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(मैंने आंटी की चूत में पुरे का पूरा लंड एक ही झटके में घुसा दिया. आंटी ने अपने कुलहो को दोनों हाथो से खोला और लंड के पेनेट्रेशन को और भी डीप बनाया.)

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मैं जैसे ही सुशिल के घर में दाखिल हुआ मैंने देखा की उसका घर पैसेदार लोगो के जैसा ही था. सुशिल को मैं तिन दिन पहले कंप्यूटर क्लास में मिला था. मेरी तरह वो भी कोलेज के फर्स्ट इयर में फेल हुआ था और उसकी मम्मी बिन्नो आंटी ने उसे टाइम बचाने के लिए कंप्यूटर क्लास ज्वाइन करवा दिए थे. आज मैंने पहली बार उसकी माँ को देखा था; करीब 39-41 की होंगी, चौड़ी छाती और सेक्सगांड. वैसे मैं आप लोगो को मेरे बारे में तो बताना ही भूल गया. मेरा नाम अनिल राजारी हैं और मैं 19 साल का हूँ, मुझे आंटी और भाभियों की चूत मारना बहुत ज्यादा ही पसंद है. सब से बड़ा फायदा आंटियो को रखेल बनाने में या उनके रखेल बन जाने में हैं क्यूंकि चूत की चूत मिलती हैं और पैसे का बोनस. मैंने भी एक टाका भिड़ा के रखा था दो महीने पहले. केराला के एक अंकल की बीवी थी, उसकी काली चूत में जम के मारता था, शायद इसलिए ही मैं फ़ैल भी हुआ था. उस आंटी के रखेल बनने का बड़ा फायदा यह था की उसका पति बड़ी पहचान वाला था तो किसी ठोले ने रास्ते में पकड़ भी लिया तो आंटी के साथ मोबाइल पर बात करवा दो, काम हो जाता था.
लेकिन वो आंटी के पति का तबादला हो गया और मैं रखेल से रंडवा हो गया और मुझे अभी ऐसी ही आंटी की तलाश थी. मुझे सेक्स का कीड़ा सुशिल की माँ बिन्नो में भी दिखा. मैंने उसी शाम सुशिल से बात कर के पता लगाया की उसके पिताजी का देहांत कुछ 4 साल पहले हुआ था. इसका मतलब 4 साल के बिन्नो आंटी की चूत तरसी हुई थी. मुझे लगा की यहाँ काँटा डाला तो बड़ी मछली फसेंगी. बिन्नो आंटी एक बेंक में काम करती थी और तगड़ी तनख्वाह लेती थी. मैं अगले दिन से सुशिल के घर ज्यादा से ज्यादा जाने लगा और आंटी को आँखों से ही चोदने लगा. आंटी सुशिल के होने के कारण शायद ज्यादा बात नहीं करती थी मेरे साथ. मैंने एक दिन सुशिल को मेरे दोस्त अनवर के साथ बाजू वाले गाँव भेज दिया और खुद सुशिल के वहाँ चला गया. शाम का वक्त था बिन्नो आंटी काम से आ गई थी. घर का नौकर थोड़ी देर पहले ही सब्जी लेने गया था. मैंने आंटी से सुशिल के बारे में पूछा. मुझे पता था की वो घर नहीं हैं फिर भी. आंटी ने कहा की वो घर नहीं हैं. मैंने कहा ठीक हैं आंटी में चलता हूँ. आंटी बोली अनिल आ तो सही, चाय शाय पी ले. मैंने मनोमन सोच रहा था आंटी तेरे चुंचो का दूध पिला मुझे बस….!

मैं सोफे पे बैठा और आंटी फ्रेश होके किचन में चली गई. थोड़ी देर में वो दो बड़े कप ले के आई और हम चाय पिने लगे. वो अपने घर की और सुशिल के बारे में बताने लगी. साथ में वो यह भी कहने लगी की पति के ना होने ससे उसे कितनी मुश्किलें पड़ रही हैं वगेरह वगेरह. मैं तुरंत समझ गया की आंटी तवा गरम कर रही हैं. यह औरत जब किसी को रखेल बनाना चाहती हैं या उस से चुदना चाहती हैं तो पहले रोने धोने से ही चालू करती हैं सब कुछ. बिन्नो आंटी ने जैसे अपने पत्ते फेंके मैंने भी अपनी स्क्रिप्ट चालू कर दी. मैंने भी कहा हां आंटी मैं समझता हूँ की एक जवान औरत को कितना दर्द होता है जब पति ना हो. (जवान कहो तो बूढी चूतें बहुत खुश हो जाती हैं.) आंटी मेरी तरफ अब अलग नजर से देख रही थी. उसने अब धीरे धीरे बात के टोन के बदल के मुझ से पूछा, अनिल तेरी और सुशिल की गर्लफ्रेंड भी होगी ना. मैंने कहा आंटी सुशिल का पता नहीं हैं मुझे लेकिन मेरी एक आंटी हैं फ्रेंड. बिन्नो आंटी हंस पड़ी और बोली, क्या आंटी. मैंने कहा, हाँ और मैंने उस रखेल आंटी के साथ सेक्स के अलावा सारी बाते बिन्नो आंटी को बता दी. बिन्नो आंटी हंसी और बोली, इसमें उस आंटी को क्या मिलता हैं. मैंने हंस के कहा, जो उसे अपने पति से नहीं मिलता हैं.

बिन्नो आंटी बोली, तू तो बदमाश लड़का हैं रे अनिल. क्या तू इस आंटी से सेक्स भी करता हैं. बीन्नो आंटी के मुहं से सेक्स सुन के मैं थोडा चमक सा गया, लेकिन फिर मैंने अपने और रखेल आंटी के किस्से बढ़ा चढ़ा के बिन्नो आंटी को बताये. जिस में मैंने सेक्स के बारे में भी जिक्र किया था. मुझे पता था की इस से बिन्नो आंटी की चूत में पसिना जरुर छूटेगा. वो थोड़ी हिल रही थी और मैंने देखा की उसके गाउन के अंदर उसके चुंचे भी कडक होने लगे थे. मैंने बिन्नो आंटी की बेताबी को भांप लिया और मैंने अब रखेल आंटी के साथ हुई मुलाक़ात और पहले सेक्स की बात सिंगल X ब्ल्यू फिल्म की स्क्रिप्ट के जैसे आंटी को बताई. तभी बिन्नो आंटी उठी और किचन में गई कप रखने के लिए. मुझे पता नहीं क्या हुआ मैं भी उसके पीछे चला गया. आंटी किचन के प्लेटफोर्म तरफ खड़ी हुई थी. उसकी चौड़ी सेक्सी गांड भूरे गाउन में सेक्सी लग रही थी. मैंने हाथ धोने के बहाने अपने लंड को आंटी के गांड से घिस दिया. मैंने हाथ धोए और देखा की आंटी चौंकी सी हैं. मैंने वापस जाने के वक्त वापस लंड को गांड से घिसा. अब आंटी से बिलकुल भी रहा नहीं गया और उसने पलट के मुझे बाहों में ले लिया. मैंने भी कस के उसे अपनी बाहों में दबोच लिया. आंटी के हाथ मेरी कमर को सहला रहे थे.
मेरा आंटीचोद कार्यक्रम चालू हो गया

मैंने एक हाथ उसकी गांड पे रखा और दुसरे हाथ से मैं उसके चुंचे दबाने लगा. आंटी बेतहाशा गर्म हो चुकी थी. उसने अपने होंठ मेरे होंठ पे दे दिए और किस देने लगी. मैंने गाउन के ऊपर से ही आंटी के दो कुलहो के बिच की दरार पर हाथ फेरा. दूसरा हाथ भी आंटी के बड़े चुंचे मसल रहा था. तभी आंटी ने मेरे लंड के उपर हाथ रख दिया. जींस की पेंट के अंदर भी मेरा लंड जबरदस्त तन के बैठा था.. किचन के अंदर ही मैंने आंटी के गाउन को उठाना चाहा, लेकिन आंटी ने मेरा हाथ पकड़ लिया. वो बोली, अरे सुशिल आ जाएगा. मैंने कहा, आंटी घबराओ मत सब रास्ता कर के आया हूँ, सुशिल दो घंटे से पहले नहीं आएगा. आप नौकर को कुछ काम बता दो एक घंटे का. आंटी ने मेरी तरफ देखा और बोला, अच्छा तो तू मुझे रखेल बनाने के पुरे प्लान के साथ आया था; मान गई अनिल तू बड़ा आंटीचोद हैं.

आंटी ने पर्स से मोबाइल निकाल के नौकर को फुल बाजार से कुछ फुल भी लाने को बोला. फुल बाजार सब्जी की मार्केट से 3 किलोमीटर दूर था इसलिए बेचारा 1 घंटा तो उलझा ही रहेगा वो. आंटी ने बिना ताकीद के अपने गाउन को अपने हाथ से उतारा और अब वो मेरे सामने काली ब्रा और पेंटी में सज्ज कड़ी थी. मैंने हाथ से आंटी के चूंचे फिर से दबाये. आंटी बोली, अनिल सालो से लंड देखने को तरस गई हूँ. अब और na तडपाओ मुझे. मैंने जींस की ज़िप खोली और अपने लौड़े को बहार निकाला. आंटी ने जैसे की सोने का लंड देखा हो वैसे उसकी आँखे खुश हो गई. वो निचे बैठी और बच्चा खिलौना खेलता हैं वैसे लंडको छूने और चूमने लगी. वो अपने होंठो से लंड के उपर मस्त किस देती थी और साथ ही मुझे अपनी तरफ खिंच रही थी. मैंने घुटनों तक उतारी हुई पेंट को पूरी उतार दिया और मैं किचन के प्लेटफोर्म से लग के खड़ा हो गया. आंटी ने थूंक हाथ में ले के लौड़े को मस्त हिलाना चालू कर दिया. यह आंटी भी उस रखेल आंटी के जैसे ही लंड की दीवानी लग रही थी. रखेल आंटी तो मेरा लंड पार्क, पार्किंग और थियेटर जैसे अलग अलग जगह चूस चुकी थी. बिन्नो आंटी ने अब अपना मुहं खोला और जैसे की गुलाब जामुन मुहं में भर रही हो वैसे लौड़े के सुपाड़े को खा लिया. आह आह मेरे मुहं से सुख के उदगार निकल पड़े. देखते ही देखते आंटी ने पुरे लंड को मुहं में भर लिया और जन्म जन्म की प्यास बूझा रही हो वैसे पुरे लंड को गले तक चूसने लगी. मैंने उसके माथे की पीछे से पकड़ा और अपनी तरफ खिंचा. आंटी ने लौड़े के उपर दांतों से चूसन दिया. मुझे उसके दांत अपने लंड पे अहेसास दे रहे थे लेकिन उसका अपना ही मजा था. मैंने अपनी जांघो के झटके मारने चालू किये और आंटी के गले को चोदने लगा. आंटी भी पुरे मुकाबले से लंड का सामना करने लगी. 10 मिनिट तक मैंने ऐसे ही आंटी के मुहं को चोदा और सारा के सारा माल आंटी के मुहं में निकाल दिया. आंटी ने किचन के बेसिन में वीर्य निकाला और पानी से कुल्ली कर ली. अब वो मेरा हाथ पकड़ के बेडरूम की तरफ ले आई. तब हम दोनों बिलकुल नंगे थे.
चुसाने के बाद आंटी की चूत मार

आंटी ने मुझे बेड पे बिठाया और अलमारी से एक डिल्डो निकाल के ले आई. उसने मुझे डिल्डो दिया और बोली, तेरा लंड खड़ा होता हैं तब तक तू मेरी चूत और गांड को खुश कर दे. आंटी कुतिया की तरह टाँगे उठा के बेड पे लेट गई. उसके चुतड वाला भाग उसने ऊँचा कर के रखा हुआ था. मैंने आंटी की चूत को खोला और डिल्डो अंदर दे दिया. मैं जोर जोर से हाथ चला रहा था और आंटी की चूत को डिल्डो से चोद रहा था. मैंने दुसरे हाथ की ऊँगली में थूंक लगाया और आंटी की काली गांड के छेद पे ऊँगली रखी. अंदर थोडा झटका दिया था की अंदर ऊँगली धंस गई. मैं अब आंटी की चूत को डिल्डो से चोद रहा था और उसकी गांड में ऊँगली दे रहा था. आंटी की बेताबी देख के मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और चूत और गांड को सलामी देने लगा. मैंने खड़े हो के डिल्डो को निकाला और खुद अपने लौड़े को आंटी की चूत के होंठो पे घिसने लगा. आंटी की आँखे बंध हो गई और वो आह आह की आवाजे निकालने लगी. मैंने आंटी की चूत में पुरे का पूरा लंड एक ही झटके में घुसा दिया. आंटी ने अपने कुलहो को दोनों हाथो से खोला और लंड के पेनेट्रेशन को और भी डीप बनाया. सच में आंटी की चूत में मेरी रखेल बनने की अजब खुमारी चढ़ी थी. मैंने भी अपने गधे छाप लंड को अंदर तह तक घुसा दिया और जोर जोर से आंटी को चोदने लगा. आंटी की गांड के उपर में जोर जोर से चमाट लगाने लगा. आंटी के मुहं से अजब अजब आवाजे निकल रही थी. वो बोल रही थी, चोद दे अपनी बिन्नो रानी को अबे ओ अनिल आंटीचोद, मैं भी तेरी रखेल बनूँगी, बना ले मुझे अपनी रखेल और चोद दे अपनी इस रखेल को तेरे लंड से.

मैं आंटी को और भी जोर जोर से चमाट मारने लगा और आंटी भी सामने उतनी जोर से गांड हिला हिला के चुदवाने लगी. इस मस्ती मस्ती में 20 मिनिट की चुदाई हो गई और पता भी नहीं चला. मेरा लंड एक बार फिर से खाली होने की कगार पे था. मैंने आंटी के कुल्हे फाड़े और लंड और जोर से अंदर बाहर करने लगा. आंटी अब भी मेरी रखेल बनने की मांग के साथ गांड हिलाते जा रही थी. जैसे ही मेरा माल निकलने वाला था मैंने लंड को निकाल के आंटी की गांड के छेद पे उसका रस निकाला. आंटी को अभी भी शान्ति नहीं मिली थी इसलिए मैंने अपना वीर्य से लिपटा वीर्य उसके गांड के छेद के उपर रगड़ा. आंटी आह आह ओह ओह करते हुए लेट गई. 10 मिनिट के बाद वो उठी और किचन में जाके गाउन पहनने लगी. वो मेरी जींस और शर्ट भी ले आई. उसने मुझे कपडे दिए और बोली, अनिल जल्दी कपडे पहन लो बनवारी (उसका नौकर) आता ही होगा. मैंने कहा, आंटी मजा आया की नहीं मेरी रखेल बनके. आंटी मुस्कुराते हुए बोली, अभी रखेल बनी कहा हूँ, अगले हफ्ते बनवारी को दो दिन की छुट्टी दे दूंगी और सुशिल को मामा के वहाँ कुछ काम से भेजूंगी. तब तू आना 48 घंटे के लिए मेरे घर पे फिर कम से कम एक दर्जन बार चुदाई करुँगी तेरे साथ. उस दिन के बाद मैंने तेरी रखेल बनूँगी….!

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