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(छवि ने अपना हाथ अंकल की जांघों पर फेरना शुरू किया. अंकल का लंड एकदम तनकर खड़ा हो गया था.. लेकिन अभी तक वो अंडरवियर के अंदर ही था. तो उन्होंने छवि को अपनी आखों से इशारा करते हुए उनका अंडरवियर निकालने को कहा)

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हेलो दोस्तों.. मैं अरमान आप सभी के सामने अपनी दूसरी कहानी लेकर आया हूँ और मैं उम्मीद करता हूँ कि यह कहानी भी आप सभी को मेरी कहानी बहुत पसंद आएगी.. आज मैं आपको बताने जा रहा हु कि किस तरह से मेरी बीवी छवि कैसे पड़ोस वाले अंकल से चुदने लगी? आज मैं आपको उनके सेक्स एनकाउंटर के बारे में बताने जा रहा हूँ और मुझे यकीन है यह आपको ज़रूर पसंद आएगी.

दोस्तों, मेरे अन्दर एक अजीब सी कशिश है और मुझे अपनी बीवी छवि को किसी और से चुदते हुए देखने का कितना मन करता है? इसलिए मैंने यह एक आईडिया निकाला.. यह आईडिया मुझे एक ऑफिस से आया जहाँ पर मैं कुछ काम से गया था. मैं केबिन में बैठा था और मैंने देखा कि जो भी लोग ऑफिस में आ रहे है उन्हें मैं देख सकता था.. लेकिन कोई केबिन के अंदर नहीं देख सकता था. तो मैंने बोला कि सर यह आपने अच्छा करवाया है कि आप सब पर नज़र रख सकते हो.. लेकिन आपको कोई नहीं देख सकता. तो उन्होंने मुझे बताया कि इसको टू वे कांच बोलते है.. जिससे हम बाहर वाले को देख सकते है.. लेकिन बाहर वाला हमे नहीं देख सकता. फिर रात को सोते वक्त जब मैं मेरे बेडरूम में गया तो मैं आईने के सामने खड़ा था और मुझे आईडिया आया कि अगर मैं भी यहाँ पर टू वे कांच फिट करवा दूँ तो बेडरूम के अंदर क्या हो रहा है? मैं आसानी से देख सकता हूँ.. लेकिन मैं नहीं चाहता था कि मेरी बीवी को पता चले इसलिए मैं मौका ढूँढ रहा था कि जब छवि घर पर ना हो. तो मैं यह काम करवा सकता हूँ और मुझे जल्द ही ऐसा मौके मिल भी गया.. यह अगस्त की बात थी.. जब मेरी बीवी छवि अपने भाई के घर करीब 7-8 दिन राखी बाँधने के लिए गयी थी.

तो उसी समय मैं कांच वाले की दुकान पर गया और मैंने डेमो देख लिया और मैंने कहा कि मुझे ऑफिस में कांच फिट करवाना है. तो उन्होंने मुझे डेमो दिखाया और मैंने 4×4 का बड़ा टू वे कांच ले लिया कटिंग करवाकर बिल्कुल उसी साईज़ का जैसा मेरे बेडरूम में नॉर्मल कांच था ताकि छवि को शक ना हो कि कांच क्यों चेंज हो गया? वो कांच फर्निचर में स्क्रू से फिट किया हुआ था जो मैं भी बदल सकता था.. लेकिन उसके पीछे की दीवार को 4×4 की साईज़ में काटना था ताकि मैं स्टोर रूम से अपना बेडरूम देख सकूँ वो काम थोड़ा मुश्किल था और मैं नहीं चाहता था कि किसी को भी इस बात की भनक लगे कि मैं क्या करवा रहा हूँ? मैंने घर पर एक लेबर को बुलाया और उसे बताया कि मुझे यहाँ पर दरवाजा बनवाना है 4×4 का तो दीवार को गिराकर मुझे यहाँ पर जगह करवानी है. तो उसने मुझे बताया कि साहब उसमे 3-4 दिन लग जाएगे..

मैंने कहा कि नहीं मुझे दो दिन में पूरा काम चाहिए अगर तुम चाहो तो मैं डबल पैसा देने के लिए तैयार हूँ और तुम देर रात तक काम करके उसे पूरा करो. तो वो मान गया.. मुझे जैसे भी हो सके छवि के आने से पहले जल्दी काम ख़त्म करवाना था और उसके लिए मैं उसे डबल पैसा देने को तैयार था और उसने दो दिन मैं काम पूरा कर दिया और फिर मैंने कलर वाले के यहाँ से जो मेरी दीवार पर कलर था वैसा ही लाकर लगा दिया और फिर मैंने वो नॉर्मल कांच की जगह टू वे कांच को फिट करना चालू किया और मैंने टू वे कांच फिट करवा दिया फिर मैंने पूरे फर्नीचर को वैसे का वैसा सेट कर दिया जैसा पहले था और मैंने वो नॉर्मल कांच को स्टोर रूम के कोने में रख दिया.

वैसे हमारे स्टोर रूम में कोई जाता नहीं और छवि तो कभी अकेली अंदर नहीं जाती क्योंकि उसे छिपकली से बहुत डर लगता है और मैं ही एक साल में एक बार दीवाली के टाईम सफाई करने जाता हूँ वरना तो वैसे ही बंद पड़ा रहता है.. वैसे उसमे कुछ खास समान नहीं पड़ा है, कुछ पुराना फर्निचर और जैसे टीवी, एक पुरानी साईकल, पानी के पाईप, एक पुराना लकड़ी का बेड है और कुछ पुराने बर्तन और कपड़े पड़े रहते है. जो कभी काम में नहीं आते.. वो सब ऐसे ही पड़े है.. इसलिए वो कमरा हमेशा बंद ही रहता है और उसका दरवाजा हमारे घर के पीछे है इसलिए ज्यादातर कोई उस पर ध्यान नहीं देता.. लेकिन मैंने उसी का ही फ़ायदा उठाया और यह प्लान बनाया था जिससे मैं छवि को दूसरो के साथ सेक्स करते हुए खुलकर देख लूँ और उसे शक भी ना हो.

छवि करीब 6 अगस्त को जल्दी सुबह आ गयी और मुझे उसका कॉल आया कि मैं स्टेशन पर आ गयी हूँ. तो मैं उसे लेने चला गया और फिर वो आकर बेड पर लेट गयी और मैं भी उसके पास लेट गया. तभी थोड़ी देर के बाद मैंने उसके ऊपर हाथ डाला.. लेकिन वो कुछ नहीं बोली. फिर मैं धीरे धीरे उसके बूब्स पर हाथ ले गया.. लेकिन उसने मेरा हाथ हटा दिया और बोली कि अरमान मैं बहुत थक गयी हूँ प्लीज मुझे थोड़ा आराम करने दो. तो मैंने सोचा कि 7-8 दिन से चुदी नहीं है तो ना नहीं कहगी.. लेकिन उसने साफ माना कर दिया. तो मैंने भी कुछ नहीं कहा करीब 8.30 हुए और मैंने छवि से कहा कि क्या टिफिन बना दोगी मुझे ऑफिस जाना है? तो उसने कहा कि अरमान मैं थक गयी हूँ तुम प्लीज आज होटल से मँगवाकर खा लेना.. तो मैंने कहा कि ठीक है और मैं ऑफिस चला गया.. लेकिन ऑफिस में मेरा मन नहीं लगा और मैंने बॉस से सरदर्द और चक्कर का बहाना करके छुट्टी ले ली और मैं 11.00 बजे घर आ गया.

फिर मैंने देखा कि घर का दरवाजा अभी भी बंद था और मैंने देखा कि छवि अभी उठी नहीं थी. मैं धीरे से घर के पीछे चला गया और धीरे से स्टोर रूम का दरवाजा खोलकर अंदर चला गया और मैंने टू वे कांच से देखा तो अंदर बेडरूम की सारी खिड़कियां बंद होने के कारण बहुत अँधेरा था.. लेकिन थोड़ा थोड़ा दिख रहा था. छवि अभी तक वही कपड़े पहने सो रही थी और मैंने स्टोर रूम में जो बेड था उसे नीचे गिराया और कुछ पुराने गद्दे पड़े थे उसमे से एक को उठाकर उसके ऊपर डाल दिया और आराम से बैठा और उसके उठने का इंतजार करता रहा. फिर करीब 12:15 के आस पास उसके मोबाईल पर किसी का कॉल आया और उसकी आँख खुल गयी और उसने बस थोड़ी सी ही बात की और कहा कि हाँ वो पहुंच गयी है और फिर फोन रख दिया शायद वो मेरी सास का फोन था.. लेकिन उस कॉल ने मेरा काम कर दिया और छवि को नींद से जगा दिया था.

फिर वो थोड़ी देर ऐसे ही बेड पर पड़ी रही और थोड़ी देर बाद वो बेड से उठी और उसने लाईट चालू की.. वो सलवार और कमीज़ पहने हुए थी और उठकर उसने सलवार का नाड़ा टाईट किया और कांच के सामने आकर खड़ी हो गयी और बाल बनाने लगी मुझे इस साईड से तो ऐसा ही लगा कि वो मुझे देख रही है. तो मैं थोड़ा डर रहा था.. लेकिन वो मुझे देख नहीं पा रही थी और वो बाल बनाकर दूसरे रूम में चली गयी. फिर मैं आराम से बैठ गया करीब एक डेढ़ घंटे के बाद वो नहा धोकर फ्रेश हो गयी और खाना खाने के बाद वापस बेडरूम में आई.. उसने हल्के गुलाबी कलर की साड़ी पहनी हुई थी और कंप्यूटर चालू किया और अपने मैल चेक किए फिर याहूँ मैसेंजर पर लॉग इन किया. तभी थोड़ी ही देर मैं उसके मोबाईल पर कॉल आया और उसने बात की वो किसका कॉल था मुझे पता नहीं चला.. लेकिन उसने जो बोला वो मैं आपको बताता हूँ.

छवि : हाँ मैं आज सुबह ही आई हूँ.. हाँ करीब 6.30 के आस पास.. नहीं वो ऑफिस गये है. अभी नहीं, अभी नहीं मैं बहुत थक गयी हूँ. तो ठीक है मैं थोड़ी देर में आपको कॉल करती हूँ. फिर उसने थोड़ी देर बाद मुझे कॉल किया.. लेकिन मैं बात नहीं कर सकता था क्योंकि अगर वो सुन लेती तो प्राब्लम हो जाती इसलिए मैंने कॉल काट कर दिया और मैंने उसे मैसेज किया कि छवि मैं अपने बॉस के साथ एक मीटिंग में था और अब हम ऑफिस के काम से बाहर जा रहे है आने में थोड़ा टाईम लगेगा.. शायद 7-8 बज जाएगे. फिर उसका जवाब आया कि ठीक है और मैंने जैसा सोचा था वैसा ही हुआ उसने तुरंत ही किसी नंबर पर मिस कॉल किया और फिर उसके मोबाईल पर कॉल आया और उसने बातें कि जो एक साईड मैंने सुनी वो आपको बताता हूँ.

छवि : हाँ मैंने उनको कॉल किया और वो तो शाम को 7-8 बजे आएगे.. हाँ ठीक है आना है तो आ जाओ और उसने कॉल रख दिया. फिर 10 मिनट बाद मेन दरवाजे पर बेल बजी और छवि कंप्यूटर से उठकर दरवाजा खोलने गयी और फिर वापस कंप्यूटर पर बैठ गयी और आवाज़ लगाई कि दरवाजा बंद करके आना. फिर मैंने देखा कि वही पंजाबी अंकल भूपेन्द्र सिंह बेडरूम में आए और बेड पर बैठ गये और छवि ने कंप्यूटर चालू छोड़ दिया और पीने को पानी लाकर दिया और पास में बैठ गयी. तो अंकल ने छवि को जांघ पर हाथ घुमाया और बोले कि डार्लिंग कितने दिन के बाद आई हो और आज भी आने को मना कर रही थी. फिर छवि ने बोला कि नहीं मैं सफर के कारण थक गयी थी इसलिए मना किया था. तो वो बोला कि चलो मैं तुम्हारी थकान उतार देता हूँ.. छवि ने कहा कि वो कैसे? तो वो बोले कि बस तुम पूछो मत मैं तुम्हारी सारी थकान उतार दूँगा और तुम जाकर यह जग, ग्लास किचन में रखकर आओ.

तो वो रखकर वापस आई और अंकल ने उसे बाहों में भर लिया और चूमना शुरू कर दिया और बेड पर लेटा दिया और उसके ऊपर आ गये और बातें करने लगे. तो अच्छा बताओ कैसे मेरी थकान उतारोगे? तो वो बोले कि क्या सचमुच थक गयी हो? तो छवि बोली कि हाँ बाबा सच में सफर करके आई हूँ और सुबह 6.30 बजे ही आई. तो अंकल बोले कि ठीक है एक काम करो कोई पुरानी बेडशीट हो तो वो लेकर आओ. छवि ने पूछा कि पुरानी क्यो? तो वो बोले कि तुम लेकर तो आओ और छवि अंदर से एक पुरानी बेडशीट लेकर आई और अंकल ने उसे डबल बेड पर बिछा दिया और बोले कि अब तुम लेट जाओ.. छवि लेट गयी और फिर अंकल ने जो कांच के पास ड्रॉयर है खोला और उसमें से तेल की बॉटल निकाली.

छवि : यह क्यों निकाला?

अंकल : थोड़ी तुम्हारे पैरों को मसाज कर देता हूँ तो थकान मिट जाएगी.

छवि : हाँ ठीक है.

फिर छवि ने अपनी साड़ी घुटनों तक ऊपर कर दी और फिर अंकल ने थोड़ा तेल उसके पैरों पर डाला और हाथ घुमाने लगे और छवि को एक हफ्ते से किसी मर्द ने छुआ नहीं था इसलिए वो थोड़ी मचलने लगी. फिर अंकल ने धीरे धीरे घुटनों तक हाथ लगाया और फिर उसे बातों में उलझाए रखा और घुटनों से ऊपर उसकी जांघ पर हाथ घुमाना शुरू किया तो छवि ने कसकर बेडशीट पकड़ ली.. मुझे टू वे कांच से साफ दिख रहा था कि वो कितनी तड़प रही थी.

अंकल : साड़ी निकाल दो ना.

छवि : हाँ निकाल रही हूँ.

तो छवि ने साड़ी पेटिकोट और ब्लाउज सब निकाल दिया और वो अब सिर्फ़ ब्रा पेंटी में थी और पीठ के बल बेड पर लेटी हुई थी. अंकल ने उसकी जांघो पर थोड़ा तेल डाला और मसाज शुरू किया छवि तड़पने लगी, अंकल ने धीरे से एक हाथ उसकी पेंटी पर लगाया.

अंकल : यह वही है ना जो पहली बार मैंने दी थी.

छवि : हाँ वही है.

अंकल : बहुत पसंद है?

छवि : हाँ.

अंकल : तो फिर उतार दो इसे वर्ना तेल से खराब हो जाएगी.

छवि : अहहा बड़ा दिमाग़ लगाते हो उतरवाने के लिए.

अंकल : तेरे जैसी कमसिन जवानी के लिए तो कुछ भी लगाना पड़े कोई हर्ज नहीं.

छवि : ठीक है फिर तुम्ही निकाल दो वैसे भी तुम्हारी ही दी हुई है ना.

अंकल : ठीक है.

अंकल ने पेंटी की दोनों साईड की लेस खोल दी और छवि को बोला कि थोड़ा ऊपर उठो ताकि वो बाहर निकाल दे और अंकल ने पेंटी को निकालकर साईड में रख दिया और छवि छाती के बल लेट गयी.

अंकल : क्यों क्या हुआ डार्लिंग शरमा गयी?

छवि : नहीं जी वो मैं कह रही थी कि ब्रा की लेस भी खोल ही दो.

अंकल : बड़ी समझदार हो.

छवि : साथ में तुम जैसा हट्टा कट्टा तगड़ा मर्द हो तो समझदार बनाने में कोई हर्ज नहीं और दोनों हंस पड़े.

छवि अब बिल्कुल नंगी लेटी हुई थी और अंकल उसके पास बेड पर बैठे थे. फिर अंकल बेड से उठे और नीचे आ गए और कांच के सामने आकर अपनी टी-शर्ट निकाल दी और पेंट को भी निकाल दिया. मैंने साफ देखा कि अंडरवियर में उनका लंड तनकर एकदम लंबा और मोटा हो गया था.. वो अंडरवियर पहनकर ही छवि के पास बैठ गये और फिर तेल की बॉटल को हाथ में लिया और उसकी पीठ पर तेल डाला और फिर बॉटल साईड में रखकर दोनों हाथों से उसकी पीठ मालिश करने लगे और छवि ने तकिये को कसकर पकड़ा हुआ था. फिर अंकल धीरे धीरे हाथ को छवि की गांड पर चलाने लगे और तेल लिया और छवि के दोनों चूतड़ो पर थोड़ा तेल डाला और हाथ से रगड़ने लगे. तभी थोड़ी ही देर मैं मैंने देखा कि छवि की गांड एकदम चमक मारने लगी और अंकल उसके चूतड़ को कभी मसलते तो कभी दबाते..

लेकिन वो इतने मस्त चमक रहे थे कि किसी का भी लंड खड़ा हो जाए. मेरा तो लंड तनकर एकदम टाईट हो गया था और बस अब निकल ही जाए और मेरा भी मन कर रहा था कि मैं भी जाकर ऐसी मुलायम मुलायम गांड को मसाज दूँ. अंकल ने फिर ने उससे कहा कि तुम अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठाओ और छवि ने थोड़ी सी ऊपर उठाई और धीरे धीरे वो डॉगी स्टाईल में हो गयी. तो उसकी गांड मस्त दिख रही थी.. अंकल ने फिर से उसके चूतड़ो पर तेल डाला.. लेकिन इस बार वो तेल उनके दो चूतड़ो के बीच में से धीरे धीरे नीचे उतरने लगा. तो अंकल बड़ी वाली उंगली को दोनों चूतड़ो के बीच में से नीचे ले गये और उंगली को छवि की गांड के छेद में डाल दिया.. उसने कसकर तकिये को पकड़ लिया और दातों से तकिये को काटने लगी.

तो उससे मुझे पता चल गया कि उसको सेक्स की बहुत इच्छा हो गयी थी. तभी थोड़ी देर तक अंकल ने उंगली को छेद में अंदर बाहर किया और वो मज़े लेती रही. अंकल ने फिर उंगली बाहर निकाली और छवि की चूत पर तेल वाले हाथ रगड़ने लगे.. वो सिसकियां ले रही थी आह मम्मी आअहह बहुत तड़पा रहे हो आप और यह कहकर छवि पलट गयी और पीठ के बल लेट गयी. तो अंकल अपने तेल वाले हाथ उसकी जाँघो पर फिराने लगे.. कभी वो चूत के ऊपर छूते.. तो कभी उंगली चूत में घुसाते और मैं सब कुछ साफ साफ देख रहा था.

फिर छवि ने अंकल का हाथ पकड़ लिया.. जिस हाथ से वो उसकी चूत के साथ खेल रहे थे और इशारे से कहा कि बस अब रहने दो नहीं तो निकल जाएगा. तो अंकल ने रहने दिया. फिर अंकल ने हाथ हटा लिया.. लेकिन उनका लंड तनकर इतना मोटा हो गया था कि वो रुकने वाले नहीं थे. फिर उन्होंने छवि के बूब्स के ऊपर तेल डाला और बूब्स को मसलने लगे.. छवि ने उनके हाथ रोके.. लेकिन अंकल धीरे धीरे बूब्स मसलते रहे और मैंने देखा कि छवि के बूब्स मस्त चमकदार हो गए थे. अंकल ने उसकी निप्पल को थोड़ा मसला तो छवि खड़ी हो गयी और अंकल को रोक दिया.. अंकल ने कहा क्या हुआ? वो बोली कि कुछ नहीं और फिर लेट गयी. मुझे पता चल गया कि तो अब छवि रह नहीं पाएगी.

छवि ने अपना हाथ अंकल की जांघों पर फेरना शुरू किया. अंकल का लंड एकदम तनकर खड़ा हो गया था.. लेकिन अभी तक वो अंडरवियर के अंदर ही था. तो उन्होंने छवि को अपनी आखों से इशारा करते हुए उनका अंडरवियर निकालने को कहा. छवि ने पहले उसके ऊपर हाथ फिराया और अंकल के सामने देखकर थोड़ी सी स्माईल दी और दांतो के बीच में होंठ को थोड़ा सा काटा और ऐसा इशारा दिया जैसे अभी वो पूरा लंड लेना चाहती है. फिर अंकल बेड पर लेट गये और छवि उनकी जांघो पर बैठ गयी और उसने धीरे से अंकल का अंडरवियर उतारा और मैंने साफ साफ देखा कि अंकल का लंड करीब 6-7 इंच लंबा और तगड़ा हो गया था. छवि ने अंडरवियर निकालकर साईड में रख दी और अपने दोनों हाथों से उनका काला मोटा तगड़ा लंड पकड़ा..

लेकिन फिर भी वो छवि के हाथों में नहीं समा रहा था और वो उसे पकड़कर हिलाने लगी और हिलाते टाईम छवि की तेल वाली चमकदार गांड ऊपर नीचे हो रही थी और वो अंकल की जांघो से दब रही थी और यह सब देखकर मेरा तो निकलने ही वाला था.. लेकिन मैंने रोक दिया और मैंने सोचा कि थोड़ी देर और रुक जाता हूँ तो मज़ा आएगा और मुझे कांच में से ऐसे दिख रहा था जैसे कि मेरे सामने मेरी बीवी की ब्लू फिल्म चल रही हो और मैं बेड पर बैठे बैठे अपना लंड हिला रहा था …

दोस्तों आगे की कहानी अगले भाग में …Read >> कोई और चोद रहा था मेरी बीवी को भाग 2

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