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हस्त मैथुन यानी हाथ का सहारा लेकर लिंग घर्षण कराकर जबरन वीर्यपात कराने की क्रिया| शायद ही कोई ऐसा हो , जिसने हस्त मैथुन न किया हो| हस्त मैथुन सभी महिला और पुरुष करते हैं या फिर कभी न कभी किया है| यह अनादी काल से चला आ रहा है और अनन्त काल तक ऐसे ही चलता रहेगा|

ऐसा इसलिये होता है कि आज के नवयुवक सेक्स के प्रति कुछ अधिक ही बौराए हैं| पहले की अपेक्षा अब सेक्स की जानकारियां बढने लगी है और जिस बात को छुपाकर जानने की चेष्टा की जाती थी , आज वह खुले आम उपलब्ध है| इंटरनेट पर तो करोड़ो सम्भोग करने की वीडियोज है जिन्हे देखकर सेक्स के प्रति लोग अपनी अपनी व्यक्तिगत धारणायें बना लेते है|

युवकों और युवतियों को हस्त मैथुन की प्रेरणा ऐसे ही मिलती है| एक पुरूष में ये तत्व अधिक पाया जाता है वो किसी स्त्री को देखकर शीघ्र उत्तेजित हो जाते हैं, जबकि महिलाओं में ऐसा नहीं होता| पुरूषों का शीघ्र उत्तेजित होना एक फेनामेना है, जो उनके आटोनामिक नरवस सिस्टम, एन्डोक्राइनल सिस्टम, एज फैक्टर, मांसपेशियों की क्षमता, उनके स्वभाव आदि पर आधारित है|

किशोरावस्था में हार्मोन सिस्टम के सक्रिय होने के कारण सेक्स की प्रक्रिया को उत्तेजित करने वाले तत्व अंगों को जल्द उत्तेजित करते है, जिससे सेक्स करने की इच्छा बलवान होती है| यौन क्रिया के लिए के लिये एक ही माध्यम है और वो है स्त्री की योनि ही है और इसी मिलन के बाद सेक्स का कार्य पूर्ण होता है, लेकिन यह माध्यम किशोरावास्था और नवयुवापन में उपलब्ध नहीं होता तो हस्त मैथुन से वीर्यपात करा उत्तेजना को शान्त किया जाता है| ये एक अप्राकृतिक कृत्य है जिससे सभी को दूरी बनाकर रखनी चाहिए|

इसीलिये हिन्दू धर्म में वीर्य रक्षा के निर्देश दिये गये है| वीर्य आयुर्वेद के मुताबिक सप्त धातुओं से बनी एक धातु है जो शरीर को धारण करती है यानी शरीर के सार भाग को सुरक्षित करके शरीर को स्थापित करती है| यही शरीर को ओजवान बनाती है| इसके नष्ट होने से शरीर की कान्ति, बल, याद करने की क्षमता, शरीर के प्रतिदिन के क्रिया कलाप आदि सब कमजोर हो जाते है| अत्यधिक हस्त मैथुन करने वाले को सबसे बड़ी परेशानी ये होती है की उसका वैवाहिक जीवन कभी भी सफल नहीं होता और जीवन में तनाव