loading...
Get Indian Girls For Sex
   

Chudasi Bhabhi ne Chodna Sikhaya-5

भाभी ने मेरे लंड को पकड़ कर कहा- यह तो ऐसे रहेगा ही.. चूत की खुश्बू जो मिल गई है.. पर देखो रात के तीन बज गए है.. अगर सुबह टाइम से नहीं उठे.. तो पड़ोसियों को शक हो जाएगा.. अभी तो सारा दिन सामने है और आगे के इतने दिन हमारे हैं जी भर कर मस्ती लेना। मेरा कहा मानोगे तो रोज नया स्वाद चखोगे.. भाभी का कहना मान कर मैंने भी जिद छोड़ दी और भाभी करवट लेकर लेट गईं और मुझे अपने से सटा लिया।Click Here >> Mom playing with puccy HD fucking images मैंने भी उनकी गाण्ड की दरार में लंड फँसा कर चूचियों को दोनों हाथों में पकड़ लिया और भाभी के कंधे को चूमता हुआ लेट गया। नींद कब आई इसका पता ही नहीं चला। सुबह जब अलार्म बजा तो मैंने समय देखा.. सुबह के सात बज रहे थे… भाभी ने मुस्कुरा कर देखा और एक गरमा-गरम चुंबन मेरे होंठों पर जड़ दिया। मैंने भी भाभी को जकड़ कर उनके चुंबन का जोरदार का जवाब दिया। फिर भाभी उठ कर अपने रोज के काम-काज में लग गईं। वो बहुत खुश थीं और उनके गुनगुनाने की आवाज़ मेरे कानों में शहद घोल रही थी। तभी घंटी बजी और हमारी नौकरानी आशा आ गई। उस दिन मैं कॉलेज नहीं गया। नाश्ता करने के बाद मैं पढ़ने बैठ गया। जब आशा कमरे में झाड़ू लगाने आई.. तब भी मैं टेबल पर बैठ कर पढ़ाई करता रहा। अब पढ़ाई क्या खाक होती.. बस रात का ड्रामा ही आँखों के सामने चलता रहा। सामने खुली किताब में भी भाभी का संगमरमरी बदन और उनकी प्यारी सी रसीली चूत नज़र आ रही थी। ‘बाबू ज़रा पैर हटा लो.. झाड़ू लगानी है..’ मैं चौंक कर हकीकत की दुनिया में वापस आया.. देखा आशा कमर पर हाथ रखे मेरे पास खड़ी है.. मैं खड़ा हो गया और वो झाड़ू लगाने लगी।Click Here >> Mom playing with puccy HD fucking images मैं उसे देखने लगा.. गेंहुआ रंग.. भरा-भरा बदन… तीखे नाक-नक्शे.. बड़े ही साफ-सुथरे ढंग से सज-संवर कर आई थी। आज से पहले मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया था। वो आती और अपना काम करके वापस चली जाती थी.. पर आज की बात ही कुछ और ही थी। भाभी से चुदाई की ट्रेनिंग लेकर एक ही रात में मेरा नज़रिया बदल गया था। अब मैं हर औरत को चुदाई के नज़रिए से देखना चाहता था। आशा लाल हरी रंग की साड़ी पहने हुए थी.. जिसका पल्लू छाती पर से लाकर कमर में दबा लिया था। छोटा सा पर गहरे रंग का चोलीनुमा ढीला ब्लाउज… जिसमें से उसकी चूचियों साफ दिखाई दे रही थीं। मेरा लंड फनफ़ना गया… रात वाली भाभी की चूचियों मेरे दिमाग में कौंध गईं। तभी आशा की नज़र मुझ पर पड़ी… मुझे एकटक घूरता पकड़ उसने एक दबी से मुस्कान दी और अपना आँचल संभाल कर अपने पपीतों को छुपा लिया। अब वो मेरी तरफ पीठ करके टेबल के नीचे झाड़ू लगा रही थी। उसके उठे हुए चूतड़ तो और भी मस्त थे, मस्त फैले-फैले और गद्देदार…अहह.. मैं मन ही मन सोचने लगा कि इसकी गाण्ड में लंड फंसा कर चूचि