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मेरा नाम अंकित है में एक टीचर हूँ. उम्र 25 साल. 5”7 फीट लंबा, में आज आप लोगो को एक मस्त स्टोरी बताने वाला हूँ.
हुआ यू की मेरा एक दोस्त सुन्दर काफ़ी दिन से अपनी एक आंटी को फँसाये था उसे चोदने के लिए जगह खोज रहा था एक दिन मुझसे बोला यार अंकित कोई जुगाड़ कर यार मैने कहा अगर शाम के वक़्त वो आ सके तो में कमरे मे जुगाड़ करवा सकता हूँ रविवार को बाकी दिन तो में कोचिंग पढ़ने जाता हूँ वो बोला बात कर के बताऊंगा.
अगले दिन उसने कहा की आंटी जी रविवार को 8 बजे करीब आ जाएगी में तैयार हो गया रविवार को 8 बजे वो लोग आ गए. में कमरे से चला गया वो लोग चुदाई करते रहे 15 मिनट बाद प्रशांत का फोन आया की आ जाओ काम हो गया में आ गया तो वो आंटी बोली मुझे अपनी e-mail चेक करनी है. मैने अपना कंप्यूटर ऑन कर दिया.
वो सर्च करती रही में उनके बगल मे चेयर डाल के बेठा था. लेकिन उनको कंप्यूटर चलाना नही आता था वो बोली में तो मोबाइल मे चलाती हूँ उन्होने कहा की मुझे चलाना सीखा दो आप मैने अपने हाथ मे माउस लिया तभी उन्होने मेरे हाथ के उपर अपना हाथ रख दिया इस तरह से में सीखाने लगा इधर प्रशांत पिछे से मुझे इशारे कर के कह रहा था की रहने दो.
में भी तोड़ा बोर हो रहा था क्युकी उनको कुछ नही आता था लेकिन तभी मेरी नज़र उनके बोब्स की तरफ गई. मैने देखा की साड़ी का पल्लू नीची था ओर ब्लाउस का 1 बटन खुला था गोरे गोरे बोब्स थोड़े खुले थे. मेरा लंड फंनफना गया लेकिन फिर वो जाने के लिए रेडी हो गई लेकिन जाने के पहले वो मेरे सामने ही प्रशांत से लिपटने लगी. तब प्रशांत ने कहा आप जाओ अंकित बाइक से छोड़ देगा. मैने उनको बाइक पर बैठाया पतली गलियां सूनी थी रास्ते मे वो अचानक से मुझसे लिपट गई बोली की मुझको देख के आपका मन चंचल हो रहा था.
मैने महसूस किया है ये आप उस वक़्त मेरे बारे मे कुछ सोच रहे थे ना तभी उन्होने कहा बस बस यही रोक दो मैने बाइक रोकी वो उतर के मुझसे मेरा मोबाईल नंबर मागने लगी. मैने नंबर दिया रात मे 1 बजे करीब उनका फोन आया वो बोली क्या आप मुझसे मिलना चाहोगे. मैने कहा हा क्यू नही लेकिन प्रशांत को बुरा लगेगा वो बोली तो क्या आप दोनो एक साथ एंजाय नही कर सकते मुझे कोई प्रोब्लम नही है आप बात कर लो मैने साफ मना कर दिया की नही में अकेला ही मिलना चाहूँगा आप तो आज मज़ा ले गई हो तो वो बोली नही यार कुछ नही हो पाया.
मैने पूछा क्यू वो बोली प्रशांत तो अंदर ही नही जा पाया बाहर ही डिचार्ज हो गया हम तो सूखे ही लौटे वहा से प्रशांत कह रहा था की कई दिन से नही किया था ज्यादा जोश की वजह से नही कर पाया. मैने कहा ये तो गड़बड़ हो गई अगर में वहा होता तो ऐसा तो कभी ना होता तो अचानक बोली की में कल आ सकती हूँ वही 8 बजे मैने कहा हाँ बिल्कुल आपका स्वागत है.
अगले दिन शाम को 8 बजने के पहले ही वो आ गई फ़िरोजी कलर की साड़ी पहने सजी धजी एकदम मस्त लग रही थी 50 साल से कम नही थी लेकिन वो 35,36 साल की लग रही थी. मैने गेट लगाया ओर लाइट ऑफ कर दी नाइट बल्ब जलता रह