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Antervasna Desi Story

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम संध्या है और मेरी उम्र 24 साल है और में एक शादीशुदा औरत हूँ. मेरे पति ठेकेदार है और में एक बहुत पैसे वाले आमिर घर से हूँ. मेरे पति का नाम राहुल है और में उनके साथ अपनी प्यार भरी जिन्दगी में बहुत खुश हूँ. वैसे मैंने अपनी वर्जिनिटी को तो कॉलेज में ही गवां दिया था और राहुल भी मुझे सेक्स में हमेशा संतुष्ट करते है. उसका लंड करीब 6 इंच का है. में भी उनकी तरह सेक्स की बहुत भूखी हूँ और हम दोनों जहाँ पर जाते है लोग मुझे लगातार घूरते रहते है.

मेरे बूब्स भी बहुत बड़े 34 साईज़ के है और लोगों की निगाहे अक्सर उन पर टिकी रहती है. में भी जींस, टी-शर्ट पहनना ज़्यादा पसंद करती हूँ और राहुल को भी यह सब बहुत पसंद है. दोस्तों यह मेरी शादी के करीब एक साल बाद की बात है तब रोड बनाने के एक सरकारी ठेके की बात हमारे सामने आई. राहुल अब वो ठेका किसी भी किमत पर पाना चाहता था क्योंकि हमने शेयर बाज़ार में पहले से ही बहुत सारा पैसे लगाया हुआ था और उस समय शेयर के भाव बहुत ज्यादा गिर चुके थे इसलिए घर पर भी थोड़ी सी टेंशन चल रही थी. अब जब तक उस शेर के भाव फिर से ना बढ़े तब तक हमारे पैसे वहां पर फंस चुके थे इसलिए इस ठेका का हमे मिलना बहुत आवश्यक था और अब उस ठेके के लिए मुझे किसी सरकारी आदमी का साथ होना ज़रूरी था क्योंकि सब उनके ही हाथ में होता है. राहुल ने बहुत कोशिश की, लेकिन कुछ हासिल नहीं हुआ.

तभी मैंने उसे बताया कि मेरे कॉलेज का एक दोस्त है राज और उसकी पहुंच बहुत ऊपर तक थी और अगर उसकी मदद ली जाए तो कैसा रहेगा? तो राहुल ने कहा कि यह बात तो बहुत अच्छी है तुम उसको जल्दी से फोन करो. तो मैंने कहा कि में हमारे एक दोस्त से उसके फोन नंबर ले लेती हूँ और फिर राहुल अपने काम पर चला गया. दोस्तों राज अपने कॉलेज के समय में कई लड़कियो को चोद चुका था क्योंकि उसका स्टाईल ही कुछ ऐसा था कि हर लड़की उस पर मरती थी और वो मेरे कॉलेज के ग्रुप का जो बॉस है उसका खास दोस्त था जिसका मोबाईल नंबर मेरे पास पहले से ही था तो मैंने उसको फोन करके राज का नंबर लेकर राज को कॉल किया.

में : हैल्लो राज में संध्या बोल रही हूँ.

राज : हाए आज तुमने अचानक से राज को कैसे याद कर लिया?

में : हाँ यार दोस्त ही तो कभी ना कभी काम आते है मुझे तुमसे कुछ काम था.

राज : हाँ कहो ना ऐसा क्या काम है और वैसे भी राज सुंदर लड़कियों के काम के लिए हर वक़्त तैयार रहता है.

में: राज क्या हम कहीं मिल सकते है क्योंकि में तुम्हे वहां पर अपनी पूरी बात विस्तार में थोड़ा आराम से बता सकती हूँ?

राज : चलो ठीक है फिर कल दोपहर को तुम मेरे घर पर आ जाओ, में घर पर बिल्कुल अकेला ही रहता हूँ.

में : हाँ तो फिर एकदम ठीक है, में कल दोपहर को तुम्हारे घर पर आ जाती हूँ हम वहीं पर बैठकर अपनी बात कर सकते है.

फिर अगले दिन दोपहर को मैंने काली कलर की जींस और गुलाबी रंग का टॉप पहना हुआ था उसमे से मेरे बूब्स थोड़े से बाहर दिख रहे थे जिसे देखकर कोई भी मर्द उसे पाने को बैताब हो जाए, मैंने अपने घर से बाहर निकलने से पहले उसे कॉल किया और कहा कि में वहां पर आ रही हूँ और में करीब आधे घंटे में वहां पर पहुंच गई. वो भी मेरा बहुत इंतजार कर रहा था.

मैंने वहां पर पहुंच कर देखा कि उसका घर बहुत शानदार था उस समय उसकी मम्मी घर पर नहीं थी और पापा बिजनेस के सिलसिले में कुछ दिनों के लिए बाहर गये हुए थे. अब में वहां पर पहुंचकर अंदर सोफे पर जाकर बैठ गई. उसने मुझसे पूछा कि चाय या कॉफी क्या चलेगा? मैंने कहा कि चाय चलेगी और अब हम थोड़ी देर इधर उधर की बातें करते रहे और फिर चाय बनकर आई. हमने वो कुछ ऐसे ही बातें करते करते पी ली. फिर उसने अपने नौकर से कहा कि तुम आज अपने घर पर चले जाओ. हमें कुछ जरूरी काम है और अब में उसकी यह बात सुनकर उसकी तरफ देखने लगी.

फिर उसने नौकर के बाहर जाते ही दरवाजे को अंदर से अच्छी तरह से बंद कर दिया और बिल्कुल मेरे पास सोफे पर आकर बैठ गया और फिर मुझसे बातों ही बातों में हंसी मजाक करते हुए कहने लगा कि तुमने अपना फिगर शादी के बाद भी बहुत अच्छी तरह सम्भालकर रखा है. तुम दिखने में आज भी बहुत हॉट सेक्सी और सुंदर भी हो. तो मैंने उसे मुस्कुराते हुए धन्यवाद कहा और फिर उसने मुझसे मेरे काम के बारे में पूछा.

मैंने उससे कहा कि मुझे वो रोड बनाने वाला ठेका चाहिए इसके लिए सरकारी आदमी की मदद की ज़रूर पड़ेगी और उसके बदले में हम उसे कुछ पैसों का भी हिस्सेदार बना सकते है, लेकिन वहां तक मेरे पति की पहुंच नहीं है इसलिए मुझे इस काम को करने के लिए तुम्हारी मदद चाहिए. तुम मिस्टर गिरीश सक्सेना जो यहाँ के बहुत अच्छे सरकारी पद पर है उसे जानते हो इसलिए तुम अगर मेरी कुछ मदद कर सको तो मेरे लिए बहुत अच्छा रहेगा. फिर वो मुझे अब पूरी तरह ऊपर से नीचे तक देखने लगा और उसकी नज़रें मेरे बूब्स पर जैसे ठहर सी गई थी और फिर उसने कहा कि हाँ में तुम्हारी मदद जरुर कर सकता हूँ, लेकिन मुझे इसके बदले में क्या मिलेगा? तो मैंने झट से कहा कि तुम चाहो तो इस काम के बदले में मुझसे कुछ पैसे ले सकते हो.

वो मेरे मुहं से यह बात सुनकर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा और फिर कहने लगा कि पैसे किसे चाहिए? और अब वो मेरे बहुत करीब आ गया और उसने अपना हाथ मेरे कंधे पर रख दिया. में उसकी इस अचानक हुई हरकत से थोड़ी सी हिचकिचाई और बहुत धीरे से बोली कि फिर तुम्हे क्या चाहिए? वो अपने एक हाथ को मेरे पीछे मेरी पीठ पर ले जाकर धीरे धीरे सहलाने लगा. अब मैंने उससे एक बार फिर से पूछा कि प्लीज राज बताओ ना तुम्हे क्या चाहिए? तभी उसने कहा कि तुम.

दोस्तों में तो उसके मुहं से यह शब्द सुनकर बिल्कुल स्तब्ध ही रह गई क्योंकि मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि वो मुझसे ऐसा कुछ कहने वाला है या वो मेरे लिए अपने मन में एसी कोई बात छुपाकर रखे हुआ था. में उसके उस शब्द को बहुत देर तक सोचती रही कि में अब इसकी बात का क्या जवाब दूँ? तभी मैंने कुछ देर सोचकर उससे कहा कि में अब एक शादीशुदा औरत हूँ और यह सब बिल्कुल भी ठीक नहीं है में ऐसा कभी नहीं कर सकती. तुम अगर चाहो तो मुझसे कुछ और ले सकते हो.

तभी उसने मेरा यह जवाब सुनकर वो अपना हाथ धीरे धीरे मेरे कंधे से नीचे उतारने लगा तो मैंने उससे कहा कि राज यह सब ठीक नहीं है. फिर वो झट से बोला कि तुम क्या समझती हो कोई शादीशुदा औरत अपनी शादी के बाद भी मज़े नहीं करती? और उस बीच वो मेरे बूब्स के ऊपर से खुले हुए हिस्से पर अपनी एक उंगली को घुमाने लगा और में उससे कहने लगी कि नहीं यह ठीक नहीं है प्लीज अब बंद करो. तभी उसने मुझसे कहा कि अगर कॉलेज में तुम मेरे अच्छे दोस्त की गर्लफ्रेंड ना होती तो में उसी वक़्त तुम्हे चोद सकता था और तुम्हारे कॉलेज का बॉस भी मुझे हमेशा तुम दोनों की सारी बातें बता दिया करता था और उसने तुम्हे किस किस जगह पर ले जाकर चोदा है, वो सब मुझे भी पता है. दोस्तों अब में उसकी यह सारी बातें सुनकर बिल्कुल हैरान रह गई और में सोचने लगी कि यह मेरी पिछली सारी सच्चाई जानता है और अब अगर इसने मेरे पति को इनमे से कुछ भी बता दिया तो में फंस सकती हूँ.

में उससे बहुत डरने लगी और फिर थोड़ी हिम्मत करके मैंने उससे कहा कि वो बात अलग है क्योंकि राज तब मेरी शादी भी नहीं हुई थी. तभी उसने बहुत प्यार से आग्रह करते हुए मुझसे कहा कि में इतने बड़े ठेके में तुम्हारी मदद भी तो कर रहा हूँ. मैंने उसके बदले में सिर्फ़ तुमसे थोड़ा सा प्यार ही तो माँगा है और तुम भी बहुत अच्छी तरह उस ठेकेदार की पहुंच को जानती हो और अब उसने बातों ही बातों में मौके का फायदा उठाते हुए मेरे टॉप के ऊपर से मेरे सीधे बूब्स को पकड़ लिया और उसे धीरे से दबाने लगा.

में : नहीं प्लीज राज अब छोड़ दो, में यह सब तुम्हारे साथ नहीं कर सकती.

तभी उसने मेरे मुहं को पकड़ा और उसने मुझे होंठो पर एक बहुत हल्का सा किस किया, लेकिन फिर भी मैंने उसका कोई साथ नहीं दिया. में तेज तेज सांसो को लेकर उसे घूरकर देखने लगी. उसने एक बार फिर से एक धीरे से किस किया, लेकिन मैंने फिर भी उसका साथ नहीं दिया. उसने मुझे देखा तो उस समय मेरी दोनों आखें बंद थी और अब में उससे एक और किस की आशा कर रही थी, लेकिन थोड़ी देर बाद किस ना करने पर मैंने आखें खोली तो वो मेरी तरफ मुस्कुरा रहा था.

फिर उसने तुरंत ही मुझे एक बहुत लंबा किस किया और अब में भी उसका साथ देने लगी थी. उसने अपनी जीभ को मेरे मुहं में अंदर तक डालकर मुझे कई मिनट तक किस किया. हमारे होंठ बहुत देर तक चूसने की वजह से बिल्कुल लाल हो चुके थे. अब उसने अपनी टी-शर्ट को उतार दिया और मेरे टॉप को भी निकालने लगा और कुछ ही पल में उसने मेरी ब्रा को भी उतार दिया अब में उसके सामने सिर्फ़ अपनी जींस में थी और वो भी अब अपनी जींस में था. तभी उसने मेरा एक हाथ उसकी ज़िप पर रख दिया. मैंने भी उसका इशारा समझकर उसकी पेंट को उतार दिया और अंडरवियर को भी उतारकर फेंक दिया. तब मैंने देखा कि उसका लंड करीब 8 इंच का था और एकदम तना हुआ.

फिर उसने मुझे बालों से पकड़कर अपना मोटा लंबा लंड मेरे मुहं में डाल दिया और कहने लगा कि मुझे पहले से पता है कि तुम्हे लंड सूचना बहुत पसंद है, मुझे तुम्हारे बॉस ने बताया था. अब में उसके लंड को बहुत देर तक चूसती रही और वो आअहह उहहह्ह्ह करता रहा. फिर वो मुझे अपनी बाहों में उठाकर अपने बेडरूम में ले गया उसने वहां पर जाते ही मेरी जींस और पेंटी को भी उतार दिया और अब मेरी चूत को चाटने लगा. दोस्तों मैंने आज तक ऐसा सेक्स कभी नहीं किया था. वो मेरी चूत को फैल फैलाकर लगातार कुत्ते की तरह चाट रहा था और में ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ ले रही थी उह्ह्ह्हह्ह आईईईईइ राज प्लीज अब मुझे छोड़ दो, प्लीज मेरे साथ ऐसा मत करो ऊईईईईईई माँ छोड़ दो मुझे, लेकिन उसने मेरी एक बात भी नहीं सुनी.

में इस बीच एक बार उसके मुहं में झड़ चुकी थी और वो मेरा पूरा का पूरा चूत रस चाट गया और फिर कुछ देर बाद उसने अपने लंड को चूत के मुहं पर रखा और एक ज़ोर का झटका दे दिया आअहह उह्ह्ह्हह्ह और अब उसका आधा लंड मेरी चूत के अंदर जा चुका था और अगले ही झटके में उसने पूरा का पूरा लंड मेरी चूत के अंदर डाल दिया, जिसकी वजह से में बहुत ज़ोर से चीख उठी उउऊह्ह्हह्ह्ह्हहह आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह वो मेरे ऊपर था और स्पीड बड़ाकर मुझे बहुत अच्छे तरीके से चोद रहा था और फिर कुछ देर बाद उसने मुझे गोद में उठाकर पलंग के कॉर्नर पर बैठ गया और मुझे नीचे जमीन पर लटका दिया. मेरी पीठ और सर का कुछ भाग जमीन को अटका हुआ था मेरे दोनों पैर उसकी कमर के दोनों और से पलंग पर थे और उसने मुझे कमर से पकड़ा था और चोद रहा था.

मैंने आज तक ऐसी पोज़िशन में कभी भी अपनी चुदाई नहीं करवाई थी. कुछ देर बाद उसने मुझे वापस पलंग पर ले जाकर मुझे लेटा दिया और मेरे दोनों पैर को बंद करके मेरे हाथ के पास ले गया और अपने लंड को मेरी चूत में डालकर चोदने लगा. तभी मेरे मोबाइल में रिंग बजी उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया. मैंने कॉल रिसीव किया, वो मेरे पति राहुल थे. उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या कुछ काम हुआ? तो मैंने उनसे कहा कि हाँ राज हमारी मदद करने को मान गया है और इस वक़्त राज मेरे बूब्स को दबाने में लगा हुआ है. तो राहुल ने कहा कि अच्छा ज़रा राज को दो फोन और फिर मैंने उसे फोन दे दिया और अब में उसके लंड को चूसने, चाटने लगी.

राहुल : तुम्हारा बहुत बहुत धन्यवाद राज कि तुम हमारी मदद करने के लिए तैयार हो गए.

राज : ओह कोई बात नहीं सब ठीक है ( वो मेरी और देखकर बोला ) आख़िर संध्या आपके लिए इतना कुछ कर रही है, मुझे भी तो तुम्हारी थोड़ी बहुत मदद करनी ही पड़ेगी और फिर वो मेरी तरफ देखकर हंसने लगा.

राहुल : तुम तो पहले से ही जानते होंगे कि वो उसके दोस्तों से शुरू से ही कितनी खुश रहती है. वैसे में उन सभी में सबसे ज्यादा किस्मत वाला हूँ जो अब संध्या मुझे चाहती है.

राज : जी हाँ में उसे जानता हूँ कि संध्या आपकी पत्नी पहले कभी एक बहुत अच्छी लड़की भी रह चुकी है.

मैंने उसके मुहं से यह बात सुनकर उसकी तरफ मुस्कुरा दिया और फिर कुछ देर बाद उसने मुझे मोबाइल दे दिया और मुझे लेटाकर मेरे सारे बदन पर किस करने लगा.

राहुल : संध्या अगर इसके बदले में उसे कुछ चाहिए तो तुम उससे पूछ लेना.

में : हाँ मैंने उसे सबसे पहले यह सब पूछ लिया, लेकिन उसे अपने दोस्त की मदद करने पर पैसे नहीं चाहिए और इसलिए उसे में कुछ अच्छा सा गिफ्ट दे दूँगी जिसे पाकर वो खुश हो जाएगा.

राहुल : हाँ तुम्हारा ऐसा करना बिल्कुल ठीक रहेगा, लेकिन उसे कुछ अच्छा सा गिफ्ट देना जिसे लेने के बाद उसके मन में कुछ कमी जैसी बात ना रहे.

में : हाँ जान तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो. में आज उसे ऐसा गिफ्ट देने वाली हूँ जैसा उसे इससे पहले कभी किसी ने नहीं दिया होगा.

राहुल : चलो अच्छा अब यह बताओ कि तुम घर पर कब तक आ रही हो?

में : हाँ मुझे थोड़ी देर और लगेगी क्योंकि हम बहुत दिनों के बाद मिले है तो हम बैठकर कॉलेज की पुरानी बातें कर रहे है इसलिए में थोड़ी सी लेट हो जाउंगी.

राहुल : ठीक है, वैसे भी कोई जल्दी नहीं है में भी थोड़ा देरी से ही आऊंगा और तब तक तुम मज़े करो.

में : हाँ मज़े तो में बहुत देर से कर ही रही हूँ.

राहुल : ठीक है बाय.

में : बाय.

फिर उसने मुझे जानवर की स्टाईल में लेकर पीछे से मेरी चूत को अपने लंड से भर दिया और बहुत तेज़ी से धक्के देकर चोदने लगा और में आआहह उहह ऑश और ज़ोर से चोदो मुझे हाँ चोदो राज बोले जा रही थी. उसने मुझे बहुत देर तक इस तरह चोदा और अब में बहुत थक गई थी और पसीने से एकदम ऊपर से नीचे तक गीली थी. तो वो बोला कि साली कब से में तुझे चोदना चाहता था और तूने कॉलेज में बॉस के अलावा भी कितनो के बिस्तर गरम किए है में वो सब कुछ जानता हूँ, लेकिन तब मुझे ऐसा मौका नहीं मिला. कोई बात नहीं आज में तेरी चुदाई का पूरा मज़ा ले लूँगा और फिर उसने अपने लंड को अचानक से मेरी चूत से बाहर निकालकर अपना सारा गरम गरम वीर्य मेरे चेहरे पर और बूब्स पर डाल दिया और अब में किसी रंडी की तरह दिखाई दे रही थी. में उसके वीर्य को चाट रही थी.

थोड़ी देर बाद मैंने उसका लंड अपने मुहं में लिया और चाट चाटकर साफ कर दिया और उसके बाद हम दोनों बाथरूम में जाकर एक साथ नहाए और वहीं पर एक बार और चुदाई का मज़ा लिया. इस बार उसने मुझे करीब बीस मिनट तक लगातार धक्के देकर चोदा और ऐसा करते हुए हमे करीब तीन घंटे बीत चुके थे.

अब मैंने बाथरूम से बाहर निकलकर अपने एक एक कपड़े यहाँ वहां से लेकर पहन लिए थे और फिर उसने मुझसे कहा कि में कुछ ही देर में तुम्हारी मीटिंग मिस्टर गिरीश सक्सेना से फिक्स करवा दूँगा और अब उसने हमारे कॉलेज के बॉस को कॉल किया और कहा कि तुम्हारी गर्लफ्रेंड आज मेरे पास आई हुई है उसका फिगर अभी भी वैसा ही है बल्कि और भी ज्यादा शानदार हो गया है, आज उसे मेरी ज़रूरत पड़ गयी थी और मैंने भी यार तेरी गर्लफ्रेंड को आज जमकर चोदा और मुझे उसे चोदने में बड़ा मज़ा आया.

फिर उसने मेरे हाथ में फोन दे दिया, बॉस ने मुझसे कहा कि वो तुम्हे कॉलेज समय से ही चोदना चाहता था, लेकिन में तुम्हे तब यह सब नहीं बता पाया था. दोस्तों में उसके मुहं से यह बात सुनकर उससे कुछ कह नहीं सकी. फिर उसने कहा कि संध्या तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो, मैंने कहा कि मुझे माफ़ करना उस ठेके के लिए मुझे उसकी मदद चाहिए थी इसलिए मैंने यह सब कुछ किया है.

वो बोला कि तुम बिल्कुल भी घबराओ मत, में जब भी वहां पर आऊंगा तो हम साथ में मज़े करेंगे और मुझे तो तेरे बाकी सारे चक्कर के बारे में भी राज ने बाद में बताया था कि किस तरह तूने कितनों के साथ रातें बिताई थी और किस किसने तुझे चोदा है, मुझे सब कुछ पता है संध्या. उनसे बात करके में थोड़ी नर्वस हो गयी क्योंकि वो मेरा सबसे पहला बॉयफ्रेंड था जिसने मेरी सील तोड़ी थी और फिर में वहां से कुछ देर बाद अपने घर पर वापस आ गयी.

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम संजना है और में सबसे पहले आप सभी को बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहती हूँ क्योंकि आप लोगों की वजह से ही हम जैसे लोगों को अपनी बात कहने का मौका मिलता है और अब में अपनी घटना को विस्तार से सुनाने जा रही हूँ जिसमें मैंने मेरी बुआ के पति के साथ अपनी चुदाई के बहुत मज़े लिए.

दोस्तों उस समय मेरी दीवाली की छुट्टियाँ चल रही थी और मुझे कुछ दिन घूमने, आराम करने के लिए गाँव जाना था, लेकिन मेरे साथ घर वाले नहीं जा सकते थे क्योंकि माँ और पापा को अपने ऑफिस जाना था और भाई की कोचिंग क्लास अभी तक शुरू थी, लेकिन मेरी बुआ का परिवार भी गाँव जाने वाला था. हर साल एक परिवार को वहां पर जाकर दीवाली से पहले का सब काम करना रहता है, लेकिन इस साल मेरे सभी चाचा भी बहुत व्यस्त थे. मेरी बुआ ने कहा कि वो लोग वहां का सब काम कर लेंगे और मेरी बुआ को हमारा गाँव उनके ससुराल के गाँव से कुछ ज़्यादा पसंद था क्योंकि हमारा गाँव एक टापू के पास में है.

तो दोस्तों हुआ यह कि मेरे पापा ने मुझसे कहा कि में भी उन लोगो के साथ गाँव जा सकती हूँ. मेरी बुआ का बेटा निखिल मेरे बराबर ही है और मेरी उसके साथ अच्छी जमती है तो में भी अब उनकी यह बात सुनकर राज़ी हो गई और फिर हमने दस दिन का प्लान बनाया.

उसमे से कुछ दिनों के लिए बुआ के ससुराल जाने का प्लान भी था क्योंकि वहां पर उनकी देवरानी गर्भवती थी तो उन्हे गोद भराई की मदद करने के लिए जाना था. दोस्तों मेरी बुआ की उम्र करीब 40-42 साल होगी और उनके पति की उम्र भी करीब 43-44 साल होगी, उनके पति जहाज पर काम करते थे और वो दिखने में बहुत स्मार्ट भी थे. वो साल के आठ महीने जहाज पर बिताते थे और बाकी चार महीने अपने घर पर. फ्रेंच कट वाली दाड़ी, पूरी तरह से साफ चेहरा, 6 फुट हाईट, उनका अच्छा दिखने वाला शरीर था.

दोस्तों मेरी उनके पति के साथ भी बहुत अच्छी जमती थी और वो हमेशा मेरे साथ एक दोस्त की तरह बात करते थे और बहुत मस्ती मजाक़ भी करते थे, लेकिन मेरी बुआ थोड़ी खराब है, लेकिन वो मुझसे बहुत प्यार करती है और बुआ बहुत झगड़ालू भी है. पता नहीं उनका परिवार उनको रोज़ कैसे सहता है?

अब हम गाँव में पहुंच गये और हमारे गाँव के घर में हमारा जो नौकर है सोनू, उसकी कुछ ही महीनो पहले शादी हुई थी और अब हम पहली बार उसकी नयी नवेली दुल्हन से मिल रहे थे. वो बहुत सुंदर थी और वो करीब 22-23 साल की थी. वो दोनों अपने क्वॉर्टर में रहते थे और उनका क्वॉर्टर हमारे घर के पीछे की तरफ था. उसके लिए एक दरवाजा घर के अंदर से यानी हमारी किचन से था और दूसरा दरवाजा बाहर से था.

दोस्तों हमारा घर भले ही बहुत बड़ा था, लेकिन उसकी बनावट पुरानी स्टाइल में थी यानी कि दरवाज़े पर नये तरह के ताले नहीं थे पुरानी टाईप की कुण्डी थी और दरवाज़े भी पुराने टाईप के लकड़ी वाले थे. पहले दिन हम बहुत अच्छी तरह से सेट हुए और सोनू की बीवी सुप्रिया बहुत सुंदर थी, भले ही वो ज़्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी और वो हमारी भाषा इतनी अच्छी तरह से नहीं समझ पाती थी, लेकिन वो बहुत ही कम समय में हमारे घर का सब काम अच्छी तरह से सीख गयी थी और वो खाना भी अच्छा ख़ासा बना लेती थी और बुआ के पति उसके साथ भी बहुत मस्ती मजाक़ किया करते थे.

एक दिन हुआ यह कि हम घर में सेट हो ही गये थे कि दो दिन में ही सोनू को अपने गाँव से कॉल आ गया और उसके पिताजी ने उसे बुलाया था क्योंकि उसके पिताजी की एक छोटी सी दुकान थी जिसमे चोरी हुई थी और अब सोनू को उन्होंने जल्दी से बुलाया था और सुप्रिया भी उसके साथ जाना चाहती थी, लेकिन सोनू ने उससे यहीं पर रहने को कहा क्योंकि घर का और हमारा ख्याल कौन रखता. वो उससे बोला कि वो जल्द से जल्द लौटने की कोशिश करेगा.

फिर अंकल ने सोनू को कुछ पैसे दिए और सोनू शाम को ही अपने घर पर चला गया और अब समस्या यह हुई थी कि दो दिन बाद बुआ, अंकल और निखिल को बुआ के गाँव जाना था. उनकी देवरानी की गोद भराई के लिए उनका प्लान यह था कि में सोनू और सुप्रिया के साथ घर पर ही रुकने वाली थी, लेकिन अब सोनू वहां पर नहीं था इसलिए सिर्फ़ वो हम दोनों पर पूरा घर छोड़कर नहीं जा सकते थे. तो फैसला यह हुआ कि बुआ और निखिल जाएँगे.

में और अंकल घर पर ही रुकेंगे क्योंकि गोद भराई में अंकल क्या करेंगे? और वो बुआ को अकेले भी नहीं भेज सकते और में तो उन लोगो को पहचानती भी नहीं थी इसलिए में उनके साथ नहीं जा सकती थी और सब सुप्रिया के साथ भी नहीं जा सकते थे क्योंकि घर का काम, पेड़, पौधो को पानी वग़ैरह देना होता है इसलिए हमारे साथ एक मर्द रुके इसलिए अंकल वहीं पर रुक गये. वो लोग वैसे भी सिर्फ़ दो रातो के लिए गये थे.

तो हमारा पहला दिन बहुत अच्छा गया, लेकिन में गौर कर रही थी कि अंकल सुप्रिया के साथ कुछ ज़्यादा ही मस्ती मजाक़ कर रहे थे और सुप्रिया भी उनसे बात करते वक़्त बहुत शरमाती. अब रात हुई और हमने खाना खा लिया और दस बजे सुप्रिया अपना सारा काम खत्म करके सोने चली गई. हमेशा अंकल और निखिल हॉल में सोते थे और बुआ और में अंदर.

आज भी हम वैसे ही सोए थे और में अकेली अंदर और अंकल अकेले हॉल में और सुप्रिया अपने क्वॉर्टर में सो गई. मुझे उस रात जल्दी नींद नहीं आ रही थी और में बस बिस्तर पर करवटे बदल रही थी. रात को करीब 11:30 बजे मुझे प्यास लगी तो में अपने कमरे से बाहर गई.

मैंने देखा कि अंकल अपने बिस्तर पर नहीं है. में जब किचन में गई तो मुझे किचन के अंधेरे में पास के क्वॉर्टर्स के बंद दरवाज़े के अंदर की लाईट चालू दिखी और अंदर से हल्की सी बातों की आवाज़ भी आ रही थी. मैंने किचन की लाईट को चालू किया और पानी पीने लगी और अब अचानक अंदर से आने वाली आवाज़ें बंद हो गई. मैंने लाईट को बंद किया और बाथरूम में चली गई और मैंने बाथरूम से बाहर आने के बाद देखा तो अंकल हॉल में अपने बिस्तर पर लेटे हुए थे.

अब उन्होंने भी मुझे देख लिया तो मैंने उनसे पूछा कि आप कहाँ गये थे? उन्होंने कहा कि में सिगरेट पीने बाहर गया था, क्यों तुम अभी तक सोई नहीं? तो मैंने कहा कि मुझे अंदर नींद नहीं आ रही है तो उन्होंने कहा कि अरे तुम भी बाहर आकर सो जाओ. फिर मैंने अपनी चादर उठाई और बाहर आकर अंकल के पास में सो गई और अंकल के साथ कुछ देर बातें करने के बाद मुझे नींद आ गई.

उस रात में फिर से नहीं जागी. दूसरे दिन सब कुछ ठीक ठाक था और पूरा दिन कुछ ख़ास नहीं था, लेकिन अंकल और सुप्रिया की मस्ती आज बहुत ज़ोरो में चल रही थी. फिर रात को हमेशा की तरह सुप्रिया ने दस बजे अपना पूरा काम खत्म किया और सोने चली गई और में आज भी अंकल के पास लेट गई, लेकिन में अंकल के साथ कुछ देर बातें करने के बाद सो गई. फिर रात को अचानक से मेरी आँख खुली तो मैंने देखा कि अंकल मेरे पास नहीं थे और वो आस पास भी कहीं नहीं थे. मैंने जब घड़ी में देखा तो एक बज रहे थे और दरवाज़े की कुण्डी भी अंदर से लगी हुई थी और अब मेरी नींद पूरी तरह से भाग गई थी. में किचन की तरफ गई तो मैंने देखा कि आज भी उस क्वॉर्टर की लाईट अंदर से चालू थी और अंदर ज़ीरो बल्ब भी था. में दरवाज़े के पास गई और अब मैंने उसे धक्का देना चाहा तो दरवाज़े की अंदर से कुण्डी लगी हुई थी.

फिर मैंने दरवाज़े पर अपना एक कान लगाया तो अंदर से कुछ आवाज़ भी नहीं आ रही थी बस पंखे की आवाज़ आ रही थी. फिर में खिड़की की तरफ गई और खिड़की को धक्का दिया तो वो थोड़ी सी खुल गई और मैंने अंदर देखा कि सुप्रिया चटाई पर पीठ के बल लेटी हुई थी उसके बाल खुले हुए थे और उसने उसका गाऊन नीचे से ऊपर किया हुआ था और उसकी दोनों आखें बंद थी और दोनों पैर फैले हुए थे. पैरों के बीच में अंकल पूरे नंगे होकर उस पर चढ़कर उसे धीरे धीरे धक्के देकर चोद रहे थे. अब में वैसे ही खड़ी रही और देखने लगी. अंकल जैसे ही ज़ोर का धक्का देते तो सुप्रिया ऊपर हो जाती. वो लोग पूरे रूम में अपनी चुदाई की ठप ठप आवाज को फैला रहे थे.

फिर कुछ देर बाद सुप्रिया उनको बस और नहीं बस करो कहने लगी तो अंकल ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगे और उसे लंड के जल्दी जल्दी आने जाने के दर्द से तकलीफ़ होने लगी और अब वो ज़ोर से हिलने लगी और अब वो लोग खड़े हो गये, लेकिन अंकल ने चोदना नहीं रोका और अंकल बीच बीच में स्पीड एकदम कम करके ज़ोर से लंड को अंदर घुसाकर उस पर चढ़ते और वो अपनी पूरी कमर उठाती. दोस्तों उसे देखकर लग रहा था कि उसे ऐसे अलग अलग स्टाइल में सेक्स की आदत नहीं थी और वो बहुत दर्द महसूस कर रही थी. उसका सर अब दीवार पर लग रहा था और अंकल उसे ज़ोर से चोद रहे रहे थे.

तभी अंकल ने एकदम से अपने धक्के रोक दिए और मैंने उनके चेहरे की तरफ देखा तो वो मुझे देख रहे थे. में जल्दी से नीचे झुक गयी और छुप गई. अब मैंने जल्दी से पीछे का दरवाज़ा धीरे से बंद किया और अपने बिस्तर पर दौड़कर लेट गई और सोने का नाटक करने लगी.

फिर अंकल मेरे अंदर आने के बहुत देर बाद आए, लेकिन अभी भी मुझे नींद नहीं आई थी. मेरी छाती अभी भी ज़ोर ज़ोर से धड़क रही थी. फिर अंकल ने मुझे आवाज़ दी, लेकिन मैंने कोई जवाब नहीं दिया क्योंकि में सोने का नाटक करने लगी थी. फिर वो लेट गये और मेरे पास में आकर मेरी तरफ बहुत ध्यान से देखने लगे क्योंकि उन्हे पता चल गया था कि में सोने का नाटक कर रही हूँ.

उन्होंने वापस मुझे आवाज़ दी, लेकिन अब भी मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो उन्होंने सोते हुए मुझ पर अपना एक हाथ रख दिया. फिर मैंने उनका हाथ अपने ऊपर से हटाया और वहां से हटकर दूर सो गई. उन्होंने मुझे ऐसे ही रहने दिया और वापस हाथ नहीं लगाया और अब मुझे कुछ देर बाद नींद आ गई. सुबह अंकल बिल्कुल अजीब सा व्यहवार कर रहे थे. वो मुझे हर बात पर घूरते यह देखने के लिए कि क्या मेरा उनकी तरफ अपना व्यहवार बदला है? में उनको अनदेखा करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन जब भी वो मिलते तो में उनसे अच्छी तरह बात करती थी, जैसे कि मैंने कुछ नहीं देखा हो, लेकिन सुप्रिया मेरे साथ बिल्कुल पहले जैसी थी, शायद वो यह सब नहीं जानती थी कि मैंने उन दोनों को देखा है. वो बस अंकल के आस पास थोड़ी शांत रहती.

उस दिन शाम को बुआ और निखिल लौट आए, सब कुछ ठीक ठाक था क्योंकि मैंने अब तक बुआ को कुछ नहीं बताया था. अंकल मुझे बार बार देख रहे थे और जैसे ही में बुआ के साथ अकेली रहती तो वो बीच में आ जाते ताकि में उनको कुछ बता ना सकूं और उस रात अंकल ने एक चाल चली ताकि में बुआ के साथ ना सो सकूं. उन्होंने कहा कि आज हम बरामडे में सोते है ताज़ा खुली हवा में, लेकिन बुआ ने साफ माना किया, लेकिन में और निखिल राज़ी हो गये और हम तीनों रात को बाहर सो गये. निखिल मेरे और अंकल के बीच में सोया हुआ था. अंकल बार बार उठकर मुझे देखते और में सोए होने का नाटक करती और फिर आख़िर में मुझे नींद आ ही गयी, उसके बाद अंकल सोए या सुप्रिया के पास गये यह में नहीं जानती. दूसरे दिन अंकल मेरे साथ जब भी अकेले बैठने आते तो में कोई ना कोई बहाना बनाकर वहां से चली जाती. उन्होंने शायद इस बात पर गौर किया और उस रात भी हम बाहर ही सोने वाले थे.

निखिल जल्दी सो गया और में कुछ देर बुआ के साथ बात कर रही थी. अंकल बार बार रूम के आस पास घूमते रहते निखिल कल की तरह बीच में सोया हुआ था तो में एक किनारे में सोई थी और अब अंकल बैठकर सिगरेट पी रहे थे. कुछ देर बाद वो उठकर कही पर चले गये और वो जब कुछ देर तक नहीं आए तब में समझ गई कि वो सुप्रिया के रूम के अंदर होंगे. में उठी और चुपचाप पीछे की साईड के दरवाज़े से अंदर चली गई, लेकिन उस क्वॉर्टर का दरवाज़ा बंद था और अंदर की लाईट भी बंद थी. में जल्दी से खिड़की की तरफ गई और मैंने जब खिड़की खोलनी चाही तो वो एकदम टाईट बंद थी और में उसे ज़ोर से धक्का देने लगी.

तभी पीछे अंकल की आवज़ आई तुम यह क्या कर रही हो? मेरी जान निकल गई और में एकदम से डर गई क्योंकि अब अंकल ठीक मेरे पीछे खड़े हुए थे, लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा और वहां से झट से चली गई. में समझ गई कि वो अब यह बात समझ गये है कि में वहां पर क्यों आई हूँ.

फिर में जाकर चुपचाप सो गई और में अभी कुछ देर पहले रंगे हाथ पकड़ी गई थी तो अंकल भी कुछ देर बाद अंदर आ गए और उन्होंने निखिल को किनारे पर धकेल दिया और खुद बीच में सो गये बिल्कुल मेरे पास में. फिर मैंने देखा कि निखिल गहरी नींद में था इसलिए ना उसे कुछ समझ आया और ना ही वो हिला था, लेकिन में अब बिल्कुल सतर्क हो गई थी. उन्होंने मुझसे धीरे से पूछा कि तुम वहां पर क्या कर रही थी? में अब नींद में होने का नाटक करने लगी, लेकिन उन्होंने फिर से मुझे हिलाकर पूछा और मैंने नींद में धीरे से कहा कि हाँ. उन्होंने कहा कि मुझे पता है तुम जाग रही हो और सोने का नाटक मत करो और मुझे सच सच बताओ कि तुम वहां पर क्या कर रही थी? तो मैंने कहा कि कुछ नहीं, उन्होंने कहा कि अब झूठ मत बोलो, लेकिन में अब भी एकदम चुप रही.

फिर से बोले क्यों तुम वहां पर क्या देख रही थी? में फिर चुप रही. अब वो मेरे एकदम करीब आए और बोले कि क्या देखना था तुम्हे? तो मैंने बहुत डरते हुए कहा कि कुछ नहीं, वो बोले कि अच्छा तो फिर तुम उस दिन क्या देख रही थी? में बिल्कुल चुप रही, लेकिन तभी उन्होंने मुझसे गुस्से से कहा कि बोलो.

मैंने नींद में कहा कि आपको वो सब पता है ना और में अपनी बाई तरफ मुड़कर सो गयी. उन्होंने मुझे पकड़कर घुमाया और बिल्कुल सीधा कर दिया और कहा कि जवाब दो. मुझे वो उस समय बहुत गुस्से में थे और में बहुत डर रही थी. मैंने भी घबराहट में कहा कि प्लीज अब आप मुझे सोने दीजिए वरना में बुआ को बताउंगी, तो वो बोले कि बोल क्या बताएगी? लेकिन में चुप रही और वो बार बार पूछते गए, बता तू क्या बताएगी? उनके बहुत बार पूछने के बाद में बोली कि वही, तो वो बोले कि वही क्या? में बोली कि कुछ नहीं.

वो अब बहुत प्यार से पूछने लगे बताओ ना बताओ में बिल्कुल भी गुस्सा नहीं करूँगा, संजना मुझसे बात करो, में तुम पर गुस्सा नहीं करूँगा. तो मैंने कहा कि मुझे नींद आ रही है प्लीज अब आप मुझे सोने दीजिए. उस समय मैंने अपनी दोनों आखें बंद कर रखी थी. फिर वो बोले कि क्यों तुम मुझ पर गुस्सा हो? में चुप रही. वो बोले कि क्या तुम अपने अंकल से ऐसे बात करोगी?

यह बात कहकर वो मेरे एकदम करीब आए और मेरे मुहं को हिलाने लगे ताकि में आँख खोल दूँ और बोले कि आखें खोलो संजू, लेकिन मैंने आंख बंद रखी और अब वो अपना चेहरा मेरे चेहरे के एकदम करीब लाए और वो अपनी नाक को मेरी नाक से रगड़ने लगे. हमारी बातें एकदम धीमी आवाज़ में हो रही थी. निखिल नींद में बहुत मस्त में था और उसे हमारी बातों का कुछ भी पता नहीं था. फिर वो बोले कि तुम क्या मुझ पर गुस्सा हो संजू? प्लीज आखें खोलो और मुझसे बात करो, तुम्हारे प्यारे अंकल से बात करो.

अब वो कुछ देर तक मेरे जवाब के लिए रुके रहे, लेकिन में जब कुछ नहीं बोली तो वो मुझे होंठो पर हल्के से किस करने लगे. में चुप रही और उन्होंने फिर से किस करना शुरू किया, क्यों तुम्हे अच्छा लग रहा है? में अपने बाई तरफ मुड़ने लगी तो वो मुझ पर पूरी तरह से चढ़ गये. मैंने नींद में कहा कि प्लीज अंकल ऐसा मत करो. वो बोले कि क्या हुआ? क्या तुम्हे पसंद नहीं क्यों बेटा? में तो बस तुमसे प्यार कर रहा हूँ. फिर अचानक से मेरे मुहं से निकल गया कि बुआ को पता चल जाएगा.

फिर वो मुझसे पूछने लगे कि क्या पता चल जाएगा संजू? लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा और बिल्कुल चुप रही और वो फिर से पूछने लगे कि बोलो क्या पता चल जाएगा? तो मैंने कहा कि आप क्या करते हो, झट से वो बोले हाँ बोला ना में क्या करता हूँ? में तो बस तुमसे बहुत प्यार कर रहा हूँ.

दोस्तों में अब कसमसाने लगी और वो अरे बेटा कहकर मुझे फिर से किस करने लगे और मुझ पर अपने आपको रगड़ने लगे. उतने में निखिल ज़ोर से चीखने लगा. अंकल जल्दी से मुझ पर से उतर गये और अंकल ने उससे कहा कि अंदर जाकर सोना वो बाहर ठंड में ना सोए. तो उन्होंने उसको उसका बिस्तर उठाने में मदद की और अंदर कमरे में रखकर आए और उन्होंने बाहर से दरवाज़ा बंद कर दिया और अब उनके लिए पूरी जगह खुली थी.

मैंने जल्दी से अपने आपको सर से नीचे तक एक चादर से ढक लिया और अपने बाई और मुड़कर सोने का नाटक करने लगी. अंकल कुछ देर तक वहीं पर खड़े रहे और फिर मेरे पास में आकर लेट गये. फिर कुछ देर बाद वो मेरी चादर को खींचने लगे. मैंने चादर को कसकर पकड़ा हुआ था. उन्होंने मुझे पीछे से पकड़ लिया और कहा कि अरे मेरी जानू बेटा क्या हुआ? अब कितना गुस्सा करोगी? चलो में कुछ नहीं करूँगा.

अब भी में वैसे ही रही और फिर वो मुझे गुदगुदी करने लगे, तो मैंने कहा कि सोने दीजिए ना अंकल वरना बुआ को बताउंगी. वो बोले अरे तुम कब से धमकी दिए जा रही हो चलो बताओ क्या बताओगी बुआ को? फिर उन्होंने ज़ोर से मेरी चादर खींची और अपने पास रख ली. में एक हाथ से चादर ढूंड रही थी तभी उन्होंने मुझे फिर से झपट लिया और मेरा मुहं ज़बरदस्ती उनकी तरफ करके किस किया.

मेरा हाथ उनके लंड की तरफ लगा तो मैंने महसूस किया कि वो सिर्फ़ अंडरवियर में थे. में जल्दी से धक्का देकर अपनी बाई तरफ सरकी और ज़मीन पर आ गयी. तो वो ज़ोर से हंसने लगे और मुझे ज़िद्दी कहने लगे. में अभी भी अपने पेट के बल ज़मीन पर लेटी हुई थी और अब उन्होंने मुझे अपनी तरफ खींचना चाहा, लेकिन में नहीं हिली. फिर वो पीछे से मेरे ऊपर चढ़ गये और अब उन्होंने मेरी गर्दन पर एक किस कर दिया और बोले अब क्या करोगी?

मैंने नींद में होने का नाटक करके कहा कि मुझे सोना है तो वो कहने लगे कि ठीक है तुम सो जाओ में भी अब तुम्हे तंग नहीं करूँगा और वो मुझ पर वैसे ही लेटे रहे. फिर जब हम ऐसे ही लेटे रहे तो मेरी आँख लगने ही वाली थी कि वो मुझ पर धीरे से अपना लंड रगड़ने लगे. में नींद में होने जैसे पड़ी रही और अब कुछ देर बाद वो थोड़ी ज़ोर ज़ोर से लंड को रगड़ने लगे. अब वो मेरी गर्दन पर धीरे से किस करने लगे और उन्होंने अपनी अंडरवियर को भी नीचे कर दिया था और अपना कड़क और खुला लंड मेरी साईड से मेरी गांड पर रगड़ने लगे और वो मेरा पजामा नीचे करने लगे. मैंने उन्हे बहुत रोकना चाहा.

फिर वो मेरे कान के पास आए और बोले कि शीईईईइ तुम सो जाओ, में कुछ नहीं करूँगा. फिर उन्होंने मुझे गाल पर किस किया और वापस मुझ पर लेट गये और धीरे धीरे लंड रगड़ते रहे. मेरे थोड़ा शांत हो जाने के बाद वो धीरे धीरे मेरा पजामा नीचे सरकाने लगे, लेकिन अब मैंने कुछ नहीं कहा और उन्होंने पूरा उसे पूरा नीचे सरकाया और हल्के से मेरी गांड को चूमा. उन्होंने लगातार मेरी गांड पर बहुत सारे किस दिए और ऐसे करते करते मेरी पेंटी को भी उतार दिया.

में उनसे एक बार फिर से मना करने लगी तो वो बोले कि अरे कुछ नहीं बस थोड़ा खुलकर सो जाओ. फिर उन्होंने मेरी पेंटी, पजामा मेरे पैरों से पूरी बाहर निकाल दी और अपनी भी अंडरवियर को उतार दिया. वापस मुझ पर सोते वक़्त उन्होंने मेरी चूत पर एक किस कर दिया और वो मुझ पर सो गये और बोले कि देखा कुछ नहीं हुआ ना? तुम सो जाओ. वो मुझ पर लेटे रहे और उन्होंने अपना कड़क और लंबा लंड मेरी गांड की गली में दबा दिया था.

वो कुछ देर शांत रहने के बाद फिर से धीरे धीरे अपना लंड रगड़ने लगे और फिर धीरे से लंड मेरी चूत पर लगाकर उस पर धीरे से रगड़ने लगे और मेरी गर्दन पर किस करने लगे. उनकी अब स्पीड भी बढ़ गई थी और उनकी सासें भी तेज हो गई थी. उन्होंने कुछ देर बाद धीरे से अपना लंड रगड़ते रगड़ते चूत के अंदर डालना शुरू कर दिया. में नहीं नहीं करने लगी तो उन्होंने मुझे कसकर पकड़ा और अपना पूरा लंड अंदर डाल दिया.

उन्होंने मुझे कंधे से पकड़ रखा और अब धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगे. वो अब मेरी गर्दन को काटने लगे और ज़ोर से धक्के देने लगे. वो अपना बदन मेरे बदन पर ज़ोर ज़ोर से पटकने लगे क्योंकि उन्हे डर नहीं था कि कोई आएगा. हम बाहर थे और दरवाज़ा बाहर से बंद था और हमें आस पास देखने वाला कोई नहीं था. वो अब एकदम जोश में आ गये. फिर उन्होंने मेरे दोनों पैर फैलाए और चोदने लगे.

फिर वो उठे और मुझे ज़ोर से उठाया और बिस्तर पर पीठ के बल डाल दिया और मुझ पर चढ़ गये. मेरी आखें अभी भी बंद थी. अब उन्होंने मेरे पैरों को फैला दिया और दोनों हाथों से उन्हे नीचे दबाए रखा और चोदने लगे. उन्होंने थोड़ा झुककर मेरे होंठो को काटा और ज़ोर के धक्के देने लगे, लेकिन एकदम ज़ोर से धक्का देते जिससे उनका लंड पूरा अंदर जाता और लंड वाला पूरा एरिया ज़ोर से मेरी चूत को लगता जिसकी वजह से मेरा लंड गहराईयों तक जाता जिससे मुझे दर्द होने लगा और में ऊपर नीचे होने लगी.

मैंने अपने पैर उठाए और उनके कंधे पर रख दिए. अब वो मुझे उसी स्टाइल में कुछ देर और चोदते रहे और कुछ देर बाद मेरे पेट पर अपना वीर्य गिरा दिया. वो मुझ पर लेट गये और मुझे किस करते हुए मेरे नीचे वाले होंठ को चबाने लगे. वो बहुत थके हुए धीरे से हंसने लगे. मेरी आखें अभी भी बंद थी और अब बोले कि बुआ को क्या बताएगी संजू? अंकल ने क्या किया? उन्होंने मुझे फिर से एक लंबा किस किया और वो मेरी शर्ट के बटन खोलने लगे तो में उनको रोकने लगी. फिर उन्होंने कहा कि में बस देख रहा हूँ संजू और उन्होंने बटन खोल दिए. मैंने ब्रा नहीं पहनी हुई थी क्योंकि रात को में बिना ब्रा के सोती हूँ और अब वाह संजू कहकर उन्होंने मेरे बूब्स को ज़ोर से मसला और उनको चूसा.

फिर मेरी चादर को ज़ोर से दूर फेंक दिया और मेरे बदन पर से वीर्य को साफ किया और अपने लंड पर से भी और फिर मुझे मेरी पेंटी और पजामा पहनाया. में अब अपनी बाई और मुड़ गई और उन्होंने अपने कपड़े पहन लिए. हम दोनों ने अपने ऊपर एक ही चादर डाल ली और कहने लगे कि क्यों तुम्हे तो में बच्ची समझता था. तुम तो बहुत बड़ी हो गई हो, क्यों में सच कह रहा हूँ ना? में बिल्कुल चुप रही और अरे मेरी बेटी कहकर उन्होंने मेरा मुहं पकड़कर एक फ्रेंच किस किया और कहा कि सो जाओ और वो मुझसे लिपटकर सो गये.

दोस्तों अब में बहुत थक गई थी और अब क्या होना था? में भी सो गई. वो रात भर बीच बीच में मेरे बदन पर हाथ घुमाते रहे और मेरे बूब्स दबाते रहे, मेरी गर्दन को किस करते रहे, गाल को किस करते रहे और मेरी चूत पर उंगली घुमाते रहे. फिर दूसरे दिन से अंकल बिंदास हो गये क्योंकि वो घर में एक कुंवारी लड़की और एक शादीशुदा औरत को चोद चुके थे और कोई किसी को यह बात बताएगा भी नहीं इसलिए वो एकदम बिंदास हो गये, लेकिन अब उन्होंने सुप्रिया पर से अपना पूरा ध्यान हटा दिया था और वैसे भी बुआ वहां पर थी तो वो ज़्यादा कुछ नहीं कर सकते क्योंकि सुप्रिया भी बुआ से बहुत डरती थी, लेकिन वो लोग बीच बीच में बात करते हुए जरुर दिखते और अब अंकल जब भी मेरे साथ होते तो मुझे बहुत ज़्यादा छूने की कोशिश किया करते थे. कभी मेरा कान चबाते, कभी गर्दन पर काटते, लेकिन किसी को कोई शक़ नहीं होता था क्योंकि सबको में बच्ची लगती थी.

फिर उस रात के बाद वाली रात को बहुत ज़ोर से बारिश हुई इसलिए हम बाहर नहीं सोए और में अंदर कमरे में बुआ के साथ सोई और उस रात भी अंकल चुपचाप सोए या सुप्रिया के पास गये मुझे कुछ भी पता नहीं था. दूसरे दिन घर पर पूजा थी और उस दिन सोनू भी लौट आया था. उसके दुकान में चोरी का मामला अब पुलिस के हाथों में था. अब उसे अंकल और सुप्रिया के बारे में पता चला या नहीं मुझे वो पता नहीं, लेकिन देखने से तो नहीं लगता था.

दोस्तों पूजा वाली रात को हम बाहर सोए और निखिल भी हमारे साथ सोया. उस रात भी निखिल बीच में सोया था जब में गहरी नींद में थी तो मुझे अंकल का हाथ मेरी चूत पर महसूस हुआ और उस दिन की गड़बड़ के बाद में बहुत थक गई थी और अंकल के मेरे जिस्म पर हाथ घुमाने पर भी में जल्दी नहीं जागी. उन्होंने मेरा नाईटसूट और पेंटी को नीचे से सरका दिया और फिर मेरी चूत चाटने लगे. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था, लेकिन मेरी आखों में बहुत गहरी नींद थी और उन्होंने अपने सर पर एक चादर ओढ़ ली थी ताकि निखिल अगर जागे तो उसे कुछ ना दिखे.

अंकल सब कुछ चुपचाप कर रहे थे और हम दोनों बिल्कुल भी आवाज़ नहीं कर रहे थे और अब मुझे निखिल का डर था इसलिए मैंने आखें खोल दी. अंकल फिर मेरे ऊपर आए और मेरे मुहं में अपना लंड घुसाया और चुसवाया. वो चादर के अंदर रहते हुए मेरे पैरों के बीच आकर चोद रहे थे. में भी धीरे धीरे उनके साथ सेक्स में खुल रही थी और वो जब मुझे चोद रहे थे तब निखिल हमारी तरफ मुहं करके सोया हुआ था. अंकल उठे और मेरे पास में लेट गये और चादर से ढकते हुए मेरे कंधो को पकड़े हुए मुझे ज़ोर से धक्के देकर चोदने लगे और वीर्य गिरने के बाद हम बहुत देर तक किस कर रहे थे. दोस्तों उस दिन में भी उन्हें किस कर रही थी और वो मेरे बूब्स को भी बहुत देर तक चूस रहे थे.

बचे हुए तीन दिनों में से हमने अगले दो दिन कुछ नहीं किया और उसके बाद हमने एक रात पहले सब कुछ किया. इस बार मैंने घुटनो के बल होकर डॉगी पोज़िशन में भी सेक्स किया. निखिल हमारे पास में ही सोया हुआ था और एक बार सेक्स करके सो जाने के बाद रात को तीन बजे अंकल ने फिर से मुझे जगाया और हमने इस बार खड़े होकर सेक्स किया और आखरी रात होने के कारण हमने चुदाई में कोई कसर नहीं छोड़ी. घर पर लौटने के बाद हमने फिर कभी सेक्स नहीं किया.

हाई दोस्तों मेरा नाम अभी हैं और मैं औरंगाबाद का हूँ. यह कहानी के तिन किरदार हैं. मैं, कुसुम भाभी और मेरे बड़े भाई निखिल. कुसुम भाभी हमारी पड़ोसन हैं जिसकी गोल गांड और उभरती जवानी ने सभी को हैरान कर के रखा हैं. उसके पति का नाम भूपेन हैं जो सिटी में कारखाना चलाता हैं. वो सिटी में लोहें का कारखाना चलाता हैं और उसकी बीवी यहाँ चुदाई की पाठशाला खोल के बैठी हैं. कुसुम भाभी अभी यंग ही हैं, कुछ छब्बीस साल की उम्र होंगी उसकी. मेरे बड़े भाई निखिल शादीसुदा हैं और मेरी सगी भाभी का नाम रूपा हैं. पता नहीं इतनी हसीन भाभी के होते हुए भी निखिल भैया कैसे इस ररंडी भाभी के चुंगल में आ फंसे. शायद कुसुम भाभी की गोल गांड ने उन्हें अपनी और खिंचा था. मैंने अपना नाम तो बताया ही, मैं 21 साल का हूँ और अभी डेंटल की पढ़ाई करता हूँ. यह बात तब की हैं जब मैं छुट्टियों में घर आया था. कुसुम भाभी को दस दिन लाइन दिया और ग्यारवें दिन उसे अपना मोबाइल नम्बर भेज दिया.

मुझे लगा की भाभी कॉल करें तो ठीक हैं वरना चुदाई का और जुगाड़ देखना पड़ेंगा. कोलेज में तो मेरे लिए चूत सेट हैं. मेरी मणिपुरी गर्लफ्रेंड तृषा की चूत ले के मैं खुश हूँ. कुसुम भाभी तो सिर्फ छुट्टियों का जुगाड़ था. भाभी के साथ मोबाइल पर ही प्यार मुहब्बत और ईश्कबाजी की बातें होने लगी और मैं धीरे धीरे उन्हें हॉट बातों पर भी ले गया. मैं उनकी गोल गांड की बड़ी तारीफ़ करता था और साथ में उनके बड़े बूब्स और भीगें होंठ की तारीफ़ भी हो जाती थी. कुसुम भाभी बड़ी चुदासी हुई थी और मैं उन्हें मिलने के लिए प्रेशर बनाये हुए था. भाभी हर बार अपने पति का डर बता के बात को टालने की कोशिश करती थी. वो मुझे दोपहर में अक्सर फोन सेक्स का मजा देती थी. मैं उसकी चूत और गोल गांड को फोन से ही चोदता था. भाभी भी जैसे सच में अपनी गोल गांड में लंड लिए हुई हो वैसे मोनिंग करती थी. और मैं चड्डी में ही मुठ मार के वीर्य निकाल देता था.

तभी एक दिन मेरी किस्मत जागी, कुसुम भाभी ने उस दिन कुछ दोपहर के डेढ़ बजे कॉल किया और बोली के घर आ जाओ. मैं समझ गया की आज सच में चूत और गोल गांड मिलने वाली होंगी. मैं फट से पीछे के रस्ते से उसके घर में घुसा. कुसुम भाभी ढीली नाइटी पहने वही खड़ी थी. मुझे देख के वो हंस पड़ी और बोली, आओ अभी सोरी काफी दिनों से कुछ नहीं कर पाई मैं. मैं भाभी के पास गया और मैंने देखा की भाभी के बूब्स उछल रहे थे. मतलब उसने नाइटी क निचे ब्रा नहीं पहनी थी. और जब ब्रा नहीं पहनी थी तो पेंटी के चांसिस भी कम ही थे. भाभी को मैं ऊपर से निचे तक देखने लगा और फिर मैंने उन्हें कहा, सच में आप नजदीक से भी बड़ी सेक्सी लगती हो. कुसुम भाभी हंस पड़ी. मैंने उन्हें कहा, भाभी एक बार आप की पूरी बॉडी को देखना हैं आप धीरे धीरे से घूमेंगी.

भाभी को तो जैसे की कहने की ही देर थी. वो घूमी और अपनी गोल गांड मेरे सामने निकाल के खड़ी हो गई. और फिर वो अपनी गांड को हिलाने लगी. मैं उत्तेजित हो रहा था भाभी के सेक्सी ठुमकों से. मेरा लंड मेरी पेंट में ही उछल रहा था जैसे. मैंने अपनी ज़िप खोल दी और लंड को खुली हवा में ले आया. भाभी ने मेरा लंड देखा और वो हंस पड़ी. मैं समझ गया की यह बड़ी चुदासी भाभी हैं जिसके मतलब का सामान अब बहार आ गया था. भाभी ने अब गांड को हिलाना बंध किया और वो मेरे करीब आई. मैंने अपना हाथ उसके सेक्सी बूब्स के ऊपर रख दिया और उन्हें दबाने लगा. भाभी के मुहं से आह निकल पड़ी. उसने मुझे पकड के अपनी और खिंच लिया. भाभी के दोनों बूब्स अब मैंने हाथ में दबा लिए और उन्हें जोर जोर से प्रेस करने लगा.भाभी बड़ी चुदासी हुई पड़ी थी और वो सिसकियाँ लेने लगी. तभी भाभी का हाथ मेरे लंड के ऊपर आया और उसने उसे पकड लिया. जैसे कार के गियर को हिलाते हैं वैसे ही भाभी मेरे लौड़े को हिलाने और घुमाने लगी. मुझे सच में बड़ा मजा आ रहा था.

कुसम भाभी अब लंड को बड़े ही प्यार से सहला रही थी. मैंने भाभी के कान के निचे के हिस्से में अपने होंठ लगा दिए और उन्हें हलकी सी किस दे दी. भाभी की सिसकी निकल पड़ी और उसने लंड को जोर से दबा दिया. मैं अब तहे दील से चाहता था की यह हॉट गोल गांड वाली भाभी मेरा लंड चूस दे. और शायद भाभी मन पढ़ना जानती थी क्यूंकि तभी वो अपने घुटनों के ऊपर जा बैठी और मेरा लंड उसके मुहं के सामने ही था. भाभी ने लंड के सुपाड़ें को किस किया. सब कुछ ऐसे ही लग रहा था जैसे हम दोनों फोन सेक्स में करते थे. भाभी ने लंड को और एक किस दी और फिर अपना मुहं खोल के सुपाड़ें को मुहं में ले लिया. कोई आइसक्रीम की केंडी को चूस रही हो वैसे ही भाभी मेरा लंड चूसने लगी. मैं उत्तेजना के सब से ऊपर के लेवल पर था. भाभी ने अपने हाथ मेरी गांड पर रख दिए थे और अब वो लंड को अपने मुहं में चला रही थी.

मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था भाभी के ऐसे मस्त लंड चूसने से. मैंने भी अब अपनी कमर को हिला के लंड को कुसुम भाभी के मुहं में अंदर बहार करना चालू कर दिया. भाभी ने तभी खिड़की की और देखा और मेरा लंड मुहं से बहार निकाल दिया. मेरी नजर जब खिड़की पर गई तो मेरी गांड ही फट गई. निखिल भैया वहां खड़े थे और वो मुझे और इस गोल गांड वाली भाभी को ही देख रहे थे.

निखिल भाई को देख के मेरी गांड ही फट गई जैसे. मुझे लगा की शायद भैया ने मुझे यहाँ आते देख लिया होंगा और वो अभी तक सब देख चुके थे. लेकिन निखिल भाई को देख के हॉट भाभी को तो जैसे की कुछ हुआ ही नहीं. वो तो आराम से वही बैठी रही और फिर उसने जो कहा उस से मेरी हिम्मत खुल गई.

कुसुम भाभी: क्या बात हैं निखिल, आज ऐसे ही आ गए, बिना कॉल किये?

निखिल भाई कुछ नहीं बोले लेकिन मैं समझ गया की यह हॉट भाभी को निखिल भाई भी पेलते होंगे.

निखिल भाई को भी सांप सूंघ गया था और मुझे भी. फिर उन्होंने भाभी की और देख के कहा, अरे इतने छोटे लडको को क्यूँ फंसती हो भाभी आप?

अरे छोटा कहा हैं ये. इसका लंड तेरे से भी बड़ा हैं देख तो. और आज सच में लकी दिन होंगा मेरे लिए तभी तो तुम आ गए साथ ही में. दोनों आ जाओ मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं हैं.

निखिल भाई वही खड़े रहे और भाभी को घूरने लगे.

भाभी: देख ले तुझे रुकना हैं तो रुक वरना जा.

निखिल भाई मुझे घूर रहे थे इसलिए भाभी ने उन्हें कहा: देख इसे कुछ किया तो तेरा सारा कच्चा चिठ्ठा खोल के रख दूंगी. आना हैं तो आजा हमारे साथ.

निखिल भाई दो मिनिट सोचते रहे और फिर वो हॉट भाभी के पास आ गए. कुसुम भाभी ने उनकी पेंट में हाथ डाला और उनका लंड बहार निकाला. सच में मेरा लंड मेरे बड़े भाई से भी बड़ा था. भाभी वापस मेरा लंड चूसने लगी और निखिल भाई का लंड सहलाने लगी. निखिल भाई हॉट भाभी को देख रहे थे जब वो मेरा लंड अपने गले तक भर क चूस रही थी. मैंने अपने हाथ को भाभी के माथे पर रखा था और मैं उसे आगे पीछे कर रहा था असली मजे के लिए. कुसुम भाभी भी लंड को जबान से चाटती थी और फिर उसे मस्त खिंच खिंच के चूसती थी. भाभी मेरा लंड कुछ पांच मिनिट अपने मुहं में डाल के ऐसे ही चूसती रही और मुझे लौड़े के अंदर जैसे की करंट के झटके लग रहे थे. भाभी का लंड चूसने का स्टाइल इतना मस्त था की मजा असीमित था. मैंने सोचा की अगर ऐसे ही चूसती रही यह हॉट भाभी तो मलाई अभी निकल पड़ेंगी और उसकी चूत की मजा लेने को नहीं मिलेंगा. यह सोच के मैं लंड को भाभी के मुहं से निकाल लिया. भाभी ने अब निखिल भाई का लंड अपने मुहं में डाला और उसे चूसने लगी.

निखिल भाई का लंड चूसते हुए भाभी अपनी गांड को हिला रही थी. मैंने धीरे से भाभी की गांड पर से कपडे हटा दिए और अंदर की पेंटी भी उतारफेंकी. भाभी लंड चूसने की मस्ती में इतनी वव्यस्त थी की उसने मूड के एक बार भी पीछे नहीं देखा. मैंने अब अपने लंड के सुपाड़ें पर थूंक लगाया और भाभी की चूत के ऊपर लंड को रख दिया. भाभी की चूत की गरमी और चिपचिपापन मुझे अपने लंड के ऊपर महसूस हो रहा था. जैसे ही मैंने लंड को थोडा अंदर पम्प किया भाभी की आह निकली. उसने पहली बार मुड़ के पीछे देखा और वो हंस रही थी. उसके होंठो पर निखिल भाई के लंड से निकला हुआ प्रिकम लगा हुआ था. हॉट भाभी इस अदा में और भी सेक्सी लग रही थी.

अब मैं एक और झटका दे के लंड को पूरा के पूरा भाभी की चूत में डाल दिया. भाभी की सिसकी निकल पड़ी और वो अपनी गांड को मेरे लंड के ऊपर दबाने लगी. मैंने दोनों हाथ से भाभी की गांड को अपने हाथ में =पकड ली और फिर मैं लंड को उसकी चूत के अंदर पम्प करने लगा. भाभी भी मस्तियाँ उठी और उसने अपनी गांड को हिलाना चालू कर दिया. वो अपनी गांड हिला रही थी और मैं अपनी कमर हिला के अपना लंड हॉट भाभी की चूत म ठोक रहा था. निखिल भाई वहीँ जमीन पर लेटे हुए अपना लंड इस भाभी को चूसा रहे थे और अपने छोटे भाई को बड़ा पराक्रम करते हुए देख रहे थे.

मेरा लंड भाभी की चूत की गहराई को छू रहा था और मैं उसे और भी जोर जोर से चोदता ही गया. निखिल भाई ने अभी भाभी के बाल पकड लिए थे और वो भाभी को जोर जोर से मुहं में चोद रहे थे. जब वो भाभी का मुहं जोर से चोदते थे तो मेरा लंड चूत में और भी मस्त तरीके से अंदर बहार होता था. कुसुम भाभी भी आह आह कर के दोनों भाइयों के लंड को मजे दे रही थी. तभी निखिल भाई बेड से उठे और भाभी ने भी अब पूरी तरह कुतिया वाला पोज़ ले लिया. निखिल भाई आगे से फिर से लंड मुहं में डाल के ठोकने लगे. मेरा लंड तो कभी भी इस हॉट भाभी की चूत से बहार आया ही नहीं था.

अब मुझे लगा की मैं अब ढलने वाला हूँ. मैं अपना लंड जोर जोर से भाभी की चूत में मारने लगा. और दूसरी ही मिनिट मेरा लंड वीर्य की पिचकारी मारने लगा. भाभी ने चूत टाईट की और वीर्य को अंदर भर लिया. निखिल भाई सामने थी फिर भी मैंने भाभी की गांड पर जोर से मारा और कहा, ले रंडी ले मेरा पानी तेरी चूत के अंदर….!

भाभी के ऊपर ही मैं निढाल हो गया. निखिल भाई ने अपना लंड इस हॉट भाभी के मुहं से निकाला और वो अब भाभी की चूत चोदने के लिए आगे बढे. मैंने पेंट पहनी और मैं खड़ा हुआ. निखिल भाई ने मुझ इशारा कर के बहार जाने को कहा. भाभी की चुदाई वो अकेले में करना चाहते थे शायद. मैं वहाँ से निकला लेकिन दरवाजे के पीछे से भाभी की चुदाई देखने लगा. हॉट भाभी को निखिल भाई से चुदते देखना भी बड़ा मजा दे रहा था मुझे….!

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